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मंगल पांडेय बलिदान दिवस: किस हाल में हैं शहीद के परिजन?

Fri, 08 Apr 2016 05:59 AM IST
रणजीत सिंह/अमर उजाला, दुबहर (बलिया)

सार

  • लहू बहाने वाले की प्रपौत्र वधू को हैंडपंप तक मयस्सर नहीं
  • अमर शहीद के गांव की सड़क अभी तक कच्ची
  • मुलायम की घोषणा के बाद भी नहीं बदले हालात
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मंगल पांडे - फोटो : pti
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विस्तार
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जंग-ए-आजादी में क्रांति की पटकथा लिखने वाले मंगल पांडेय की जन्मभूमि के हिस्से में उपेक्षा हाथ आई है। देश के लिए लहू बहा देने वाले इस रणबांकुरे के परिवार और गांववाले मूलभूत सुविधाओं के लिए खून के आंसू बहा रहे हैं। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की घोषणा के बाद भी इस गांव के दिन नहीं बहुरे।
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विकास की गंगा यहां कोई क्या बहाएगा शहीद की प्रपौत्र वधू एक अदद इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने की मांग करके थक चुकी हैं पर उनकी इस मांग पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अमर शहीद मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां और घर की हालत पर आप केवल अफसोस ही जता सकते हैं। गांव तक जाने वाली सड़क कच्ची और ऊबड़-खाबड़ है।

मंगल पांडेय के घर में उनकी प्रपौत्र वधू श्रीमती तेतरी देवी अपने पोते और उसके परिवार के साथ रहती हैं। वह बहुत अभावों में जीवनयापन कर रही हैं। उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता। उन्होंने कई बार घर के सामने इंडिया मार्क हैंडपंप लगवाने की मांग की पर उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई।
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शहीद के नाम पर सिर्फ घोषणाएं, काम नहीं हुआ

मंगल पांडे - फोटो : amar ujala bureau
2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यहां शहीद के नाम पर राजकीय महिला महाविद्यालय बनाने और गांव के विकास की घोषणा की थी पर यह भवन 11 साल भी बनकर तैयार नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री शहीद पांडेय की प्रतिमा का नगवां में अनावरण करने आए थे। तब से इस महाविद्यालय का संचालन एक सभाकक्ष में हो रहा है।

इसमें बीए, बीएससी और बीकाम की छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही है। पर यहां अध्यापकों का अभाव है। कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डा. चंदन शाहू ने बताया कि महाविद्यालय में केवल नौ अध्यापक हैं। यहां अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र, संस्कृत, रसायन विज्ञान तथा अर्थशास्त्र के अध्यापक ही नहीं हैं। इसके लिए अधिकारियों से कई बार पत्र व्यवहार किया गया। लेकिन यह कमी दूर नहीं हुई।

'जिस गांव का नाम मंगल पांडेय जैसे महापुरुष के साथ जुड़ा हुआ है उसे आदर्श गांव बनाने में मैं कोई कोर कसर नहीं छोडूंगी। मेरा प्रयास होगा कि मेरा गांव प्रदेश का आदर्श गांव बने।'
-मीरा पाठक, प्रधान, नगवा

'केंद्र और प्रदेश सरकार ने मंगल पांडेय की कुर्बानी को भूल कर देश के सेनानियों के साथ छल किया है। आज जिन नेताओं के नाम पर सरकारी योजनाओं का संचालन हो रहा है, मंगल पांडेय का योगदान उनसे कहीं कम नहीं है। ऐसे में मंगल पांडेय के नाम पर भी कुछ सरकारी योजनाओं का संचालन होना चाहिए।'
-कृष्णकांत पाठक, अध्यक्ष, मंगल पांडेय विचार मंच
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