तमिलनाडु में पलनीस्वामी के गद्दी संभालने के बाद केंद्र का सियासी प्रबंधन एक बार फिर विफल नजर आ रहा है। अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा के सुनहरे रिश्ते बैठे बिठाए संकट में नजर आ रहे हैं तो दूसरी ओर तमिलनाडु की सियासत में द्रमुक के साथ खड़ी कांग्रेस शशिकला के मन में हमदर्दी पैदा करने में कामयाब रही है। द्रमुक नेता एमके स्टालिन के जरिए उकसाए गए पनीरसेलवम की बगावत का सेहरा उल्टे भाजपा के सिर बंधता दिख रहा है। उल्टे पड़े दांव को देखते हुए डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री को दी गई है।
पूरे प्रकरण में राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठे। यहां तक कि वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को इस पर सफाई देनी पड़ी। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा अपने आप को तमिलनाडु की सियासत में तटस्थ नहीं रख सकी है।
इससे जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में भाजपा के अरमानों पर पानी फिर सकता है। शशिकला के जरिए सीएम बनाए गए ईके पलनीस्वामी को लेकर पार्टी रणनीतिकार आश्वस्त नहीं हैं। जिस कदर शशिकला की भाजपा से दूरी दिखी है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे राष्ट्रपति के चुनाव में पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।