फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमिलनाडु संकट पर विफल नजर आया केंद्र का सियासी प्रबंधन

Fri, 17 Feb 2017 05:48 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
तमिलनाडु में पलनीस्वामी के गद्दी संभालने के बाद केंद्र का सियासी प्रबंधन एक बार फिर विफल नजर आ रहा है। अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा के सुनहरे रिश्ते बैठे बिठाए संकट में नजर आ रहे हैं तो दूसरी ओर तमिलनाडु की सियासत में द्रमुक के साथ खड़ी कांग्रेस शशिकला के मन में हमदर्दी पैदा करने में कामयाब रही है। द्रमुक नेता एमके स्टालिन के जरिए उकसाए गए पनीरसेलवम की बगावत का सेहरा उल्टे भाजपा के सिर बंधता दिख रहा है। उल्टे पड़े दांव को देखते हुए डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री को दी गई है।   
विज्ञापन


पूरे प्रकरण में राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठे। यहां तक कि वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को इस पर सफाई देनी पड़ी। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा अपने आप को तमिलनाडु की सियासत में तटस्थ नहीं रख सकी है। 

इससे जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में भाजपा के अरमानों पर पानी फिर सकता है। शशिकला के जरिए सीएम बनाए गए ईके पलनीस्वामी को लेकर पार्टी रणनीतिकार आश्वस्त नहीं हैं। जिस कदर शशिकला की भाजपा से दूरी दिखी है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे राष्ट्रपति के चुनाव में पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

तमिलनाडु के अलावा मणिपुर में भी केंद्र सरकार का प्रबंधन विफल

सांकेतिक चित्र
बताया जा रहा है कि केंद्र ने बेशक तमिलनाडु के राजनीतिक हालातों से पल्ला झाड़ लिया हो, लेकिन सॉलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी से कानूनी राय लेकर केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री प्रदेश के राज्यपाल को लगातार दिशानिर्देश जारी कर रहे थे। मगर अंत समय में उनके दिशानिर्देश भी कामयाब नहीं रहे। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार पलनीस्वामी को बहुमत साबित करने के मामले में केंद्र सरकार की रणनीति उन्हें महज 5 से 6 दिन देने की थी। मगर राज्यपाल ने 15 दिन का समय देकर अपने दामन को बेदाग बना लिया है।

तमिलनाडु के अलावा मणिपुर में भी केंद्र सरकार का प्रबंधन विफल नजर आ रहा है। तमाम कोशिशों के बावजूद गृह मंत्रालय सूबे में जारी नाकेबंदी से जनता को राहत नहीं दिला पाया है। आलम यह है कि मामला कोर्ट में जा पहुंचा है। यहां भी केंद्र सरकार के कानूनी सलाहकार बड़ी गलती करते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक मणिपुर में नाकेबंदी के मामले में अंतिम समय में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के दबाव पर मुकुल रोहतगी ने बृहस्पतिवार को न्यायालय में सरकार का पक्ष रखने के बजाय समय ले लिया। 

अब सरकार को मामले में 22 फरवरी को अपना पक्ष रखना है। सरकार के कानूनी पक्षकारों का मानना था कि राज्य के नाकेबंदी से निपटने में केंद्र के पास अधिकार नहीं है, जबकि भाजपा यहां इसी मुद्दे के सहारे चुनाव में है। अब अगली तारीख पर न्यायालय में सरकार का पक्ष रखने से पहले सरकार के रणनीतिकार मंथन में जुटे हैं। पार्टी के एक नेता के अनुसार मणिपुर में भी बड़ी चूक की ओर केंद्र बढ़ रहा था, लेकिन अंतिम समय में मामला संभल गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें