Karur Stampede: तमिल अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय की रैलियों को करुर में हुई भगदड़ की घटना के बाद अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत और 60 से अधिक घायल हुए थे। टीवीके ने कहा कि ऐसे शोकपूर्ण माहौल में विजय की "जनता से मिलो" पहल के तहत अगले दो हफ्तों की रैलियां नहीं होंगी।
तमिल अभिनेता और तमिलगा वेत्त्री कझगम (टीवीके) पार्टी प्रमुख विजय की रैलियों में करुर में हुई भगदड़ की घटना का गहरा असर देखने को मिला है। इस हादसे में 41 लोगों की मौत और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद पार्टी ने अगले दो हफ्तों के लिए विजय की सभी रैलियों को अस्थायी रूप से स्थगित करने का एलान किया है।
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27 सितंबर को करुर में विजय की जनसभा के दौरान भगदड़ मच गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने में भारी चूक सामने आई और बड़ी संख्या में लोग दबकर जान गंवा बैठे। इस घटना के बाद से पार्टी और समर्थकों में शोक का माहौल है। टीवीके मुख्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि करुर की इस त्रासदी ने सबको हिला दिया है और ऐसे माहौल में कार्यक्रम जारी रखना उचित नहीं होगा।
दो सप्ताह तक स्थगित होंगी रैलियां
पार्टी ने कहा है कि विजय की “जनता से मिलो” पहल के तहत हर शनिवार को होने वाली रैलियां दो हफ्तों तक नहीं होंगी। विजय अब तक तिरुचिरापल्ली, नमक्कल और करुर का दौरा कर चुके हैं। करुर हादसे के बाद अगली निर्धारित रैलियां अस्थायी तौर पर रोक दी गई हैं। पार्टी ने साफ किया है कि नए कार्यक्रमों की घोषणा विजय की मंजूरी के बाद ही की जाएगी।
पार्टी का आधिकारिक बयान
टीवीके की आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि हम अपने 41 साथियों की मौत से दुखी और व्यथित हैं। इस स्थिति में हमारे नेता के अगले दो हफ्तों के कार्यक्रम स्थगित किए जाते हैं। संशोधित कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी। बयान में यह भी कहा गया कि इस मुश्किल समय में पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
शोक-संवेदना का माहौल
हादसे के बाद विजय और उनकी पार्टी नेताओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई है। विजय ने खुद भी इस त्रासदी पर शोक व्यक्त किया था और घायलों के इलाज व पीड़ितों के परिवारों की मदद के लिए कदम उठाने की घोषणा की थी। इस स्थगन को कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने "संवेदनशील फैसला" बताया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विजय की रैलियों की नई तारीखें पार्टी मुख्यालय द्वारा तय की जाएंगी। यह भी माना जा रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने के बाद ही अगले सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। करुर की त्रासदी ने न केवल पार्टी बल्कि तमिलनाडु की राजनीति पर भी बड़ा असर डाला है।