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कोयम्बटूर दक्षिण विधानसभा सीट: कमाल दिखाएंगे कमल हासन या अन्नाद्रमुक-बीजेपी गठबंधन मारेगी बाजी?

Sun, 02 May 2021 12:36 PM IST
स्वाति सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोयम्बटूर

सार

दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले इस क्षेत्र से सुपरस्टार से राजनेता बने मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के प्रमुख कमल हासन मैदान में है। लेकिन राजनीति के मैदान में पहली बार किस्मत आजमाने उतरे कमल हासन की राह यहां आसान नहीं है।
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कोयम्बटूर दक्षिण विधानसभा सीट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तमिलनाडु राज्य में विधानसभा चुनाव के सभी सीटों पर नतीजे आने हैं। राज्य की जिन कुछ हाईप्रोफाइल सीटों पर मुकाबला चर्चा में है उनमें से ही एक सीट कोयम्बटूर दक्षिण है। दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहे जाने वाले इस क्षेत्र से सुपरस्टार से राजनेता बने मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के प्रमुख कमल हासन मैदान में है। लेकिन राजनीति के मैदान में पहली बार किस्मत आजमाने उतरे कमल हासन की राह यहां आसान नहीं है। दरअसल, इस सीट पर अन्नाद्रमुक-बीजेपी गठबंधन की उम्मीदवार के रूप में बीजेपी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन, डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस नेता मयूरा जयकुमार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) ने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता चैलेंजर आर डोरिसामी को चुना है जो एक उद्योगपति हैं।

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बीजेपी की राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीनिवासन कोयम्बटूर दक्षिण में लंबे समय से काम कर रही हैं। सुपर स्टार कमल हासन के इस सीट से उतरने के बाद अब यहां मुकाबला कड़ा हो गया है लेकिन उसके पहले कोयम्बटूर दक्षिण सीट ऐसी सीट थी जहां से बीजेपी उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही थी। बड़ी संख्या में मिडल क्लास और अपर मिडल क्लास आबादी वाली इस विधानसभा सीट में 12 प्रतिशत सवर्ण वोटर हैं जो उत्तर भारतीय मूल के हैं। इन्हें बीजेपी का सपोर्टर समझा जाता है। इस सीट पर 10 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक मतदाता हैं।

तमिलनाडु में नए समीकरण की उम्मीद
बता दें कि यह पहला विधानसभा चुनाव है जब राज्य में दशकों से राजनीति के पर्याय माने जाने वाली शख्सियत एम करुणानिधि और जयललिता मौजूद नहीं हैं। अन्नाद्रमुक जयललिता का विकल्प नहीं खोज पाया है। वहीं, द्रमुक ने करुणानिधि के पुत्र स्टालिन पर भरोसा जताया है। अगर अन्नाद्रमुक सत्ता बरकरार रखने में असफल रहती है तो पार्टी में विघटन तय है। द्रमुक की जीत से स्टालिन के नेतृत्व पर मुहर लगेगी। इसके अलावा राज्य में तीसरी सियासी ताकत को उभरने का मौका मिलेगा, जिसकी कोशिश भाजपा बीते चार सालों से कर रही है।
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2016 में अन्नाद्रमुक प्रत्याशी की हुई थी जीत
श्रीनिवासन ने 2016 के विधानसभा चुनावों में 21.57 वोटिंग प्रतिशत के साथ अकेले 33,113 वोट हासिल किए थे और अन्नाद्रमुक के उम्मीदवार अम्मान के अर्जुनन ने 38.94 प्रतिशत के साथ 59,788 वोट पाकर सीट जीती थी। अन्नाद्रमुक और बीजेपी अब एक चुनावी गठबंधन में हैं और श्रीनिवासन का इस गठबंधन का उम्मीदवार होना उन्हें एक मजबूत स्थिति में रखता है। साल 2016 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मयूरा जयकुमार ने 27.60 वोटिंग प्रतिशत पर 42,369 वोट हासिल किए थे और अन्नाद्रमुक के अम्मान के अर्जुनन से चुनाव हार गए थे।

2016 के तमिलनाडु विधानसभा के नतीजे 
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा के लिए 2016 में हुए चुनाव में जयललिता की अगुवाई में अन्नाद्रमुक ने 136 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि करुणानिधि की अगुवाई वाली द्रमुक के खाते में 98 सीट आई थी। जयललिता लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठी थीं।
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