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Tamil Nadu: 'अपार्टमेंट में पालतू जानवरों के मालिकों पर जुर्माना और प्रतिबंध अवैध', चेन्नई की अदालत का फैसला

Sun, 05 Jan 2025 09:48 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

मामले की सुनवाई के दौरान चेन्नई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश एल अब्राहम लिंकन ने यह भी कहा कि कोई भी गेटेड समुदाय या अपार्टमेंट मालिकों का संघ पालतू जानवरों के मालिकों के खिलाफ कोई नियम, विनियम या उपनियम नहीं बना सकता।

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पालतू जानवरों पर जुर्माना-प्रतिबंध अवैध- चेन्नई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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चेन्नई की एक अदालत ने फैसला सुनाया है कि अपार्टमेंट मालिकों का संघ अपने परिसर में पालतू जानवरों के मालिकों पर जुर्माना या प्रतिबंध नहीं लगा सकता। तिरुवनमियुर में एक अपार्टमेंट मालिकों के संघ की तरफ से इस तरह के प्रस्ताव को 'अवैध' घोषित करते हुए, अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाई पालतू जानवरों के मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

पहली बार एक हजार, फिर तीन हजार रुपये का था जुर्माना

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यह फैसला 78 वर्षीय मनोरमा हितेशी की तरफ से दायर एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जो एक पालतू कुत्ते की मालिक हैं, जो एक गेटेड समुदाय में रहती हैं, जहां मैनेजमेंट एट्रियम ओनर्स एसोसिएशन ने पालतू जानवरों के मालिकों को लक्षित करते हुए विवादास्पद उपनियम लागू किए थे। एसोसिएशन के संशोधित नियमों ने पालतू जानवरों को अपार्टमेंट की लिफ्टों का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया और पालतू जानवरों से संबंधित अपराधों के लिए जुर्माना लगाया, जिसमें आम क्षेत्रों में शौच करना भी शामिल है। जुर्माना पहली बार अपराध करने पर 1,000 रुपये से लेकर बार-बार उल्लंघन करने पर 3,000 रुपये तक था।

सिटी सिविल कोर्ट से खारिज हुई थी महिला की याचिका
मनोरमा हितेशी ने शुरू में जुलाई 2023 में सिटी सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। उन्होंने इस निर्णय को चुनौती देते हुए अपील दायर की। अतिरिक्त न्यायाधीश एल अब्राहम लिंकन ने पहले के निर्णय को पलटते हुए कहा कि किसी भी अपार्टमेंट एसोसिएशन को पालतू जानवरों के मालिकों को दंडित करने वाले उप-नियम या विनियम बनाने का अधिकार नहीं है।
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आपसी समझ और सहयोग की आवश्यकता- न्यायालय
न्यायालय ने पालतू जानवरों के अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चिंताओं को दूर करने के लिए पालतू जानवरों के मालिकों और अपार्टमेंट एसोसिएशन के बीच आपसी समझ और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। न्यायाधीश लिंकन ने दोनों पक्षों को व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करने की सलाह दी, जैसे कि पालतू जानवरों के मालिकों के लिए 'स्कूप-द-पूप' नीति लागू करना। अपनी विस्तृत टिप्पणी में, न्यायाधीश लिंकन ने पालतू जानवरों के मालिकों को उनके पालतू जानवरों को छोड़ने या त्यागने के लिए डराने के कानूनी और नैतिक निहितार्थों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयों से आवारा जानवरों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जिससे संभावित रूप से दुर्घटनाएं हो सकती हैं और जानवरों और मनुष्यों दोनों को खतरा हो सकता है।

'पालतू जानवर को छोड़ने के लिए धमकाना अपराध'
लिंकन ने कहा, 'कृपया ध्यान रखें कि यदि कोई एसोसिएशन किसी पालतू जानवर के मालिक को उसके पालतू जानवर को छोड़ने के लिए धमकाता है, तो यह प्रभावी रूप से कानून का उल्लंघन है। पशु अधिकार कार्यकर्ता एंथनी रूबेन ने अदालत के आदेश का स्वागत किया और कहा, 'पालतू जानवरों को जानवर नहीं माना जा सकता क्योंकि वे एक साथी की भूमिका निभाते हैं।

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