तमिलनाडु में छाए जल संकट को "सही तरीके से नहीं निपटने" के लिए अन्नाद्रमुक सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को हवा देते हुए, द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने सोमवार को यहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के पलानीसामी पर इस संकट के लिए जमकर बरसे।
स्टालिन ने कहा कि एआईएडीएमके के नेता जो 'यज्ञ' कर रहे हैं वह सरकार में अपने पदों को बचाने के लिए है ना कि बारिश के देवताओं को खुश करने के लिए है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार राज्य-व्यापी जल संकट को हल करने में नाकाम रहती है तो बड़े पैमाने पर 'जेल भरो' अभियान छेड़ा जाएगा।
हालांकि, एआईएडीएमके नेता डी जयकुमार ने दावा किया कि इस विरोध को लोगों का समर्थन नहीं मिलेगा।
डीएमके कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर, स्टालिन ने नाटकीय रूप से एक खाली मटका उठाया और पूछा, "मटका यहां है, पीने का पानी कहां है?"
अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह को संबोधित करते हुए द्रमुक प्रमुख ने कहा, "सरकार के पास धन, योजनाओं, नौकरियों, उद्योगों, न्याय, कानून और व्यवस्था की कमी है। अब इसमें पानी भी शामिल हो गया है। लेकिन मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी, उनके मातहत ओ पन्नीरसेल्वम और नगर प्रशासन मंत्री एसपी वेलुमणि को कोई चिंता नहीं है।"
उन्होंने कहा, तमिलनाडु में यह स्थिति है। केंद्र सरकार के शिकंजे में काम करने वाली राज्य सरकार ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कोई पहल नहीं की है।
स्टालिन ने कहा कि इस संकट को टाला जा सकता था। उन्होंने कहा, "मैं इस बात पर बहस के लिए तैयार नहीं हूं कि 'यज्ञ' गलत हैं। यह कुछ ऐसा नहीं है जो अचानक हुआ हो। मैं पिछले एक साल से विधानसभा में झीलों में गिरते जल स्तर का मुद्दा उठा रहा हूं। लेकिन कोई प्रयास नहीं किया गया।"