कुख्यात चंदन तस्कर अपने पीछे पड़ी तमिलनाडु एसटीएफ के लोगों को उनकी आवाज से पहचान लेता था। आवाज पहचानने की इस क्षमता की वजह से वह काफी दिनों तक स्पेशल टास्क फोर्स से बचा रहा। लेकिन तमिलनाडु पुलिस ने इसका तोड़ निकाल ही लिया। वीरप्पन को मार गिराने वाली फोर्स का नेतृत्व करने वाले पुलिस अफसर के विजय ने वीरप्पन को पकड़ने की जद्दोजहद पर लिखी अपनी किताब में खुलासा किया है। उसकी आवाज पहचानने की क्षमता की वजह से पुलिस ने संख्याओं का सहारा लिया। एसटीएफ की इस रणनीति को वीरप्पन मात नहीं दे सका और आखिरकार मारा गया।
रूपा पब्लिकेशन की ओर से प्रकाशित उनकी किताब वीरप्पन : चेजिंग द ब्रिगेंड में वीरप्पन से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें वीरप्पन की ओर से की गई क्रूर हत्याओं और कन्नड़ सुपरस्टार का अपहरण कर उन्हें 108 दिनों की कैद में रहने का बहुचर्चित मामला है।