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आवाज पहचानने में माहिर वीरप्पन को चकमा देकर मारा था STF ने 

Mon, 27 Feb 2017 05:09 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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कुख्यात चंदन तस्कर अपने पीछे पड़ी तमिलनाडु एसटीएफ  के लोगों को उनकी आवाज से पहचान लेता था। आवाज पहचानने की इस क्षमता की वजह से वह काफी दिनों तक स्पेशल टास्क फोर्स से बचा रहा। लेकिन तमिलनाडु पुलिस ने इसका तोड़ निकाल ही लिया। वीरप्पन को मार गिराने वाली फोर्स का नेतृत्व करने वाले पुलिस अफसर के विजय ने वीरप्पन को पकड़ने की जद्दोजहद पर लिखी अपनी किताब में खुलासा किया है। उसकी आवाज पहचानने की क्षमता की वजह से पुलिस ने संख्याओं का सहारा लिया। एसटीएफ की इस रणनीति को वीरप्पन मात नहीं दे सका और आखिरकार मारा गया।
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रूपा पब्लिकेशन की ओर से प्रकाशित उनकी किताब वीरप्पन : चेजिंग द ब्रिगेंड में वीरप्पन से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें वीरप्पन की ओर से की गई क्रूर हत्याओं और कन्नड़ सुपरस्टार का अपहरण कर उन्हें 108 दिनों की कैद में रहने का बहुचर्चित मामला है।
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'वीरप्पन आवाज पहचानने में माहिर है'

फाइल फोटो
के. विजय कुमार ने लिखा है, जब हमें पता चला कि वीरप्पन आवाज पहचानने में माहिर है तो हमने अपनी रणनीति बदल ली। हम संख्याओं के जरिये संवाद करने लगे। वीरप्पन जहां सक्रिय था, उस 60 वर्ग किलोमीटर के इलाकों के 16 हिस्सों को हमने फिर कई हिस्सों में बांटा। फिर हमने इनके ऊपर काल्पनिक घड़ियां लगाईं। 

हम इन घड़ियों की पोजीशन को अपनी मौजूदगी के बारे में बताने के लिए इस्तेमाल करते थे। इसे हमारी टीम तो समझ सकती थी लेकिन इसे दूसरे नहीं सुन सकते। चूंकि अब उसे हमारी आवाज नहीं सुनाई देती थी इसलिए संख्याओं के लेकर वह भ्रम में रहने लगा। उसे हमारे बारे में कोई पता नहीं होता था। इस रणनीति में वह फंस गया और हमने उसे घेर लिया। इसके बाद वीरप्पन का खेल खत्म होना ही था। 
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