मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से सरकारी स्कूलों में इंग्लिश बोलना सीखने (स्पोकन इंग्लिश) को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल करने पर आठ हफ्तों में जनहित याचिका का जवाब देने का निर्देश दिया है। डीएमके के विधायक अप्पावू ने इसे लेकर जनहित याचिका दायर की थी।
जस्टिस विनीत कोठारी और अनीता सुमंथ की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि मामला राज्य की शिक्षा नीति से जुड़ा है, लिहाजा हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हालांकि हमारा मानना है कि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव याचिकाकर्ता को पक्ष रखने का उचित अवसर देंगे और उनके द्वारा दिए गए तथ्यों के बाद आठ हफ्तों के भीतर इस पर फैसला लें।
डीएमके विधायक ने याचिका में कहा कि शिक्षा नीति के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त तमिल मीडियम स्कूलों में दूसरी कक्षा से लेकर 12वीं तक इंग्लिश को दूसरी भाषा के तौर पर पढ़ाया जाता है। दूसरी कक्षा में अच्छे अंकों से प्राप्त करने के बावजूद छात्रों को इंग्लिश बोलने या समझने के साथ ही लिखने में भी खासी परेशानी होती है।
ऐसे में विभिन्न संस्थानों में पेशेवर कोर्स में दाखिला लेने में व्यावहारिक समस्या आती है क्योंकि वहां उन्हें इंग्लिश पढ़नी होती है। लिहाजा सभी सरकारी स्कूलों में इंग्लिश बोलना सीखने को अनिवार्य विषय के तौर पर लागू किया जाएगा।