तमिलनाडु भाजपा के नेता के अन्नामलाई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने दिल्ली पहुंचकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। जानिए पूरा मामला..
दक्षिण भारत की सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है। तमिलनाडु में चुनाव के बाद टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व में नई सरकार बन चुकी है। इसी बीच तमिलनाडु भाजपा के बड़े नेता के अन्नामलाई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें अपनी बातों से अवगत कराया।
PHOTO | After submitting his resignation to BJP president Nitin Nabin, K Annamalai meets Union Home Minister Amit Shah in Delhi. pic.twitter.com/L6m2Xo0VXu
राजनीतिक गलियारों में अन्नामलाई के इस्तीफे को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई और पार्टी के बीच कुछ मनभेद की खबरें भी सामने आ रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई अगले हफ्ते से अपने एक नए राजनीतिक सफर की शुरुआत कर सकते हैं। वे जब चेन्नई से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे, तभी से यह तय माना जा रहा था कि वे अपना इस्तीफा साथ लेकर जा रहे हैं।
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अन्नामलाई के करीबी सूत्र ने नई सियासी पारी की पुष्टि कर क्या कहा?
अन्नामलाई के इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की 'तीन भाषा नीति' का सार्वजनिक रूप से विरोध किया था। इससे यह संकेत मिल रहे थे कि वे अपनी राह अलग कर सकते हैं। सोमवार को उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनकी नई पार्टी 'मक्कल शक्ति अय्यकम' (जनशक्ति आंदोलन) के झंडे और डिजाइन भी साझा किए हैं। उनके करीबी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि नई सियासी पारी के लिए सब कुछ तय हो चुका है।
क्या राजनीति में अनदेखी से खफा हुए पूर्व IPS अफसर?
राजनीति में अन्नामलाई की नाराजगी की एक वजह अनदेखी भी मानी जा रही है। अन्नाद्रमुक महासचिव ईके पलानीस्वामी और अन्नामलाई एक ही क्षेत्र कोंबुनाडु और समान गाउंडर समुदाय से आते हैं। यह समुदाय अन्नाद्रमुक का समर्थक रहा है, मगर लोकसभा चुनाव में इसकी निकटता भाजपा से बढ़ी। तब अन्नामलाई भले ही कोयंबटूर सीट पर दूसरे स्थान पर रहे, मगर अन्नाद्रमुक को चौथे स्थान पर धकेल दिया। ऐसे में सतर्कता बरतते हुए अन्नाद्रमुक ने इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई की सिंगानल्लूद सीट समेत एक भी सीट भाजपा को नहीं दी। इसके विरोध में अन्नामलाई ने विधानसभा चुनाव से दूरी बना ली। सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई अपनी नई सियासी पारी में टीवीके की तरह युवाओं को जोड़ना चाहते हैं।