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Tamil Nadu National Anthem Row: राज्यपाल नाराज होकर विधानसभा से बाहर निकले; राष्ट्रगान के अपमान का लगाया आरोप

Tue, 20 Jan 2026 10:34 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।

सार

तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा का उद्घाटन भाषण नहीं दिया और कक्ष छोड़ दिया। उन्होंने राष्ट्रगान के अपमान, भाषण में असत्य और संवैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी का आरोप लगाया। जबकि सीएम स्टालिन ने कहा यह परंपरा और शिष्टाचार का उल्लंघन है।
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राज्यपाल आरएन रवि ने गुस्से में छोड़ी विधानसभा की कार्यवाही (फाइल) - फोटो : अमर उजाला /. एजेंसी
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विस्तार
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तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवी ने मंगलवार को विधानसभा का साल का पहला सत्र शुरू होने से पहले परंपरागत उद्घाटन भाषण नहीं दिया और गुस्से में कक्ष छोड़ दिया। इसका कारण राष्ट्रीय गान के प्रति सम्मान की कमी बताया। राज्यपाल ने कहा कि डीएमके सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में कुछ असत्य और गलत तथ्य थे। उनके माइक को बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई।

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राज्यपाल ने कहा मैं बेहद निराश हूं। राष्ट्रीय गान का उचित सम्मान नहीं किया गया। मेरा भाषण बार-बार रोका गया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विधानसभा के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और सभापति एम. अप्पावु ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे विधानसभा के नियमों और प्रथाओं का पालन करें।

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सीएम स्टालिन ने राज्यपाल पर लगाया शिष्टाचार के उल्लंघन का आरोप
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने परंपरा और शिष्टाचार का उल्लंघन करते हुए कक्ष छोड़ा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में राज्यपाल को अपनी राय जोड़ने या अलग कुछ कहने की कोई जगह नहीं थी। स्टालिन ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने यह कदम जानबूझकर उठाया और इसका मतलब विधानसभा की अवमानना है। मुख्यमंत्री ने यह दोहराया कि डीएमके का मानना है कि राज्यपाल की आवश्यकता नहीं है, हालांकि उनके पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई और एम करुणानिधि ने इस पद का सम्मान किया था और वर्तमान सरकार उसी परंपरा का पालन करती है।

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राज्यपाल आरएन रवी ने विधानसभा छोड़ने के कारण बताए
बाद में, राजभवन ने प्रेस रिलीज जारी कर राज्यपाल के कक्ष छोड़ने के कारण स्पष्ट किए। प्रेस रिलीज में कहा गया:

  • राज्यपाल का माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
  • भाषण में भ्रामक दावे और असत्यापित बातें शामिल थीं। 
  • दलितों के खिलाफ अत्याचार और दलित महिलाओं के साथ यौन हिंसा के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, साथ ही युवाओं में ड्रग्स का दुरुपयोग भी बढ़ रहा है, लेकिन इन गंभीर मुद्दों को भाषण में शामिल नहीं किया गया।
  • राष्ट्रगान का अपमान और संवैधानिक कर्तव्यों की अवहेलना की गई।
  • शिक्षा व्यवस्था की गिरती गुणवत्ता और खाली पदों की अनदेखी।
  • हजारों ग्राम पंचायतों में चुनाव नहीं होने की स्थिति का जिक्र नहीं।
  • मंदिरों के प्रबंधन और हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर कोई टिप्पणी नहीं।
  • MSME सेक्टर की परेशानियों को भाषण में शामिल नहीं किया गया।
  • निचले स्तर के कर्मचारियों की नाराजगी और मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई।


पिछले साल भी हुआ था ऐसा ही घटनाक्रम 
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है। पिछले साल भी राज्यपाल रवी ने विधानसभा से बाहर जाने की घटना को गहरी पीड़ा बताते हुए राष्ट्रीय गान और संविधान के अपमान का आरोप लगाया था। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह सत्र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल, जैसे AIADMK और BJP, राज्य सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी पर कई आरोप लगा सकते हैं। वहीं मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके मंत्रिपरिषद सदस्य इन हमलों का मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे विधानसभा सत्र राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण बन गया है।

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