तमिलनाडु के यासीर अहमद बाशा (29) रोजी-रोटी के लिए मिस्र की राजधानी काहिरा गया था, लेकिन वहां उनके साथ जो घटना हुई, उसके बाद उसकी जिंदगी बदतर हो गई। यासीर का आरोप है कि उसे नौकरी के नाम पर विदेश ले जाकर वहां उसकी किडनी निकाल ली गई। अब वो ये समझ नहीं पा रहा हैं कि अपनी जिंदगी का यह दर्दनाक पहलू अपनी पत्नी बच्चों के सामने कैसे बयान करें।
यासीर की परेशानी तब और बढ़ गई जब उसे किडनी रैकेट का आरोपी माना जाने लगा। उसने बताया कि उसके सिर पर बड़ा कर्ज था और वो लगातार इसे चुकाने की कोशिश में जुटा हुआ था। परिवार चलाने के लिए यासीर ने ऑटो रिक्शा चलाने का काम शुरू किया था, पर इससे भी गुजारा नहीं हो पा रहा था।
तब उसे किसी ने कहा कि मुंबई जाकर टैक्सी चलाना शुरू करो, पर हालात तब भी जस के तस बने रहे। संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद यासीर ने अहमदाबार की राह पकड़ी जहां उसकी मुलाकात एजुकेशन कंसल्टेंसी से जुड़े सुरेश प्रजापति से हुई। सुरेश ने यासिर से कहा कि वो उसे मिस्र भेज देगा। लेकिन इसके लिए उसे उसकी एक शर्त माननी होगी। यह शर्त ऐसी थी, जिसका दर्द यासीर आज भी झेल रहा है। लेकिन कर्ज चुकाने के लालच में उसने सुरेश की बात मान ली।
सुरेश ने यासीर से कहा था कि अगर वो अपनी किडनी बेचने के लिए राजी हो जाए तो वो उसे काहिरा भेज देगा। दरअसल यह एक ट्रैप था, जिसके बाद वह वो एक बड़े किडनी रैकेट के जाल में फंस गया।
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इससे पहले अहमदाबाद में उसका ब्लड सैंपल लिया गया था, जिसे काहिरा भेजा गया था। जब यासीर ने इस पर सवाल पूछा तो उसे यह कहकर चुप करा दिया गया कि विदेश में नौकरी के लिए ब्लड सैंपल लेना जरूरी होता है। इसके बाद काहिरा में उसकी मुलाकात मधु नाम के एक शख्स से हुई जिसने वहां के एक स्थानीय बद्रावी अस्पताल में उसका ऑपरेशन करवाकर उसकी किडनी निकाल ली।