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तमिलनाडु में भारी बारिश: कूनूर-मेट्टुपालयम राजमार्ग पर 10 से ज्यादा जगह भूस्खलन, बस चालक की मौत; यातायात ठप

Sat, 24 Oct 2026 08:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

तमिलनाडु के नीलगिरी और कोयंबटूर में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से तबाही मच गई। सरकारी बस चालक की मौत हो गई, कंडक्टर घायल हुआ और बारलियार गांव में एक मकान बह गया। कूनूर-मेट्टुपालयम राजमार्ग पर 10 से ज्यादा जगह रास्ते बंद हैं। आखिर पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण क्या हुआ? सड़कें कब खुलेंगी? घर गंवाने वाले परिवारों को क्या राहत मिलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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कर्नाटक में भारी बारिश से हादसा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु के नीलगिरी और कोयंबटूर जिलों में शुक्रवार रात हुई भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगह पहाड़ियों से मिट्टी, बड़े पत्थर और पेड़ सड़क पर गिरने से भूस्खलन हुआ। इस दौरान एक सरकारी बस चालक की मौत हो गई, जबकि बस का कंडक्टर घायल हो गया। बारलियार गांव में एक मकान भी बह गया। कूनूर-मेट्टुपालयम राष्ट्रीय राजमार्ग पर 10 से ज्यादा जगह भूस्खलन होने से यातायात पूरी तरह रुक गया। प्रशासन और बचाव दल रास्ते साफ करने में जुटे हैं।

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कहां-कहां हुआ भूस्खलन और कैसे गई बस चालक की जान?
नीलगिरी जिले में भारी बारिश के बाद कूनूर-मेट्टुपालयम राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्सों पर पहाड़ से मिट्टी, पत्थर और पेड़ गिर गए। मेट्टुपालयम-ऊटी मार्ग पर बारलियार के पास भूस्खलन की चपेट में सरकारी बस आ गई। इस हादसे में बस चालक जनकराज की मौत हो गई। बस के कंडक्टर केशवन को लंबे बचाव अभियान के बाद बाहर निकाला गया। वह घायल हो गया था और उसे इलाज के लिए मेट्टुपालयम सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय सरकारी बस में कोई यात्री मौजूद नहीं था। इससे बड़ा नुकसान होने से बच गया।

क्या दूसरे वाहन भी भूस्खलन की चपेट में आए?
भूस्खलन के दौरान मुर्गियां लेकर जा रहा एक मालवाहक वाहन भी इसकी चपेट में आ गया। यह वाहन पास में खड़ा था और पहाड़ से गिरे मलबे के साथ खाई में जा गिरा। हालांकि, उसका चालक सुरक्षित बच गया। हादसे में एक कार भी दबकर क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि छह दोपहिया वाहनों और कई अन्य गाड़ियों को नुकसान पहुंचा। लगातार बारिश के कारण सड़क पर जगह-जगह पानी भर गया और मलबा जमा हो गया। इससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन ने सड़क से मिट्टी, पत्थर और गिरे हुए पेड़ों को हटाने का काम शुरू किया है।
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बारलियार गांव में मकान कैसे बहा, परिवार को कितना नुकसान हुआ?
भारी बारिश के कारण बारलियार गांव में एक मकान बह गया। हालांकि, उसमें रहने वाले लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। मकान के निवासियों ने बताया कि वर्षों की मेहनत से जमा की गई उनकी संपत्ति, पैसा और घर सब बर्बाद हो गए। उनकी दोपहिया गाड़ी भी मलबे में दब गई या बह गई। परिवार ने अपनी जमा-पूंजी और घर खोने पर दुख जताया है। प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन से मदद और उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा नीलगिरी जिले के वंडीपेट्टई और अग्रहारम इलाकों में भी बारिश का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासन ने लोगों को क्या चेतावनी दी और रास्ते कब खुलेंगे?
नीलगिरी की जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्या तन्नेरू और पुलिस अधीक्षक बृंदा ने भूस्खलन प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे आपात स्थिति को छोड़कर प्रभावित सड़कों पर यात्रा न करें। प्रशासन के अनुसार, पहले मलबा हटाया जाएगा। इसके बाद राजमार्ग विभाग सड़कों की मजबूती और सुरक्षा की जांच करेगा। रास्ते सुरक्षित पाए जाने और संबंधित विभाग से मंजूरी मिलने के बाद ही सामान्य यातायात शुरू किया जाएगा। प्रशासन ने कहा है कि सड़कें यात्रा के लिए सुरक्षित होने पर लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी।

फंसे हुए यात्रियों और प्रभावित लोगों के लिए क्या इंतजाम किए गए?
भूस्खलन के कारण बसों और दूसरे वाहनों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालकर कूनूर इलाके के राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। उनके लिए भोजन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए कूनूर के कुछ सरकारी स्कूल भी खोले गए हैं। वहां उनकी मदद के लिए अधिकारियों को तैनात किया गया है। जिला प्रशासन ने आपात स्थिति में सहायता और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1077 जारी किया है, जिस पर लोग किसी भी समय संपर्क कर सकते हैं। फिलहाल प्रशासन, दमकल और बचाव दल तथा राजमार्ग विभाग की टीमें मलबा हटाने और रास्ते बहाल करने में लगी हैं। अधिकारियों ने लोगों से मौसम की स्थिति और सुरक्षा जांच पूरी होने तक गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील की है।

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