तमिलनाडु के राजनीतिक दल पीएमके में पिता-पुत्र के बीच का टकराव राज्य की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन पार्टी के विशेष महासभा की बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी का झुकाव अब भी डॉ. रामदास के साथ है और वे ही पार्टी के शीर्ष पद पर बने रहेंगे।
तमिलनाडु की राजनीतिक दल पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) में चल रहे सियासी खींचतान के बीच रविवार को एक अहम फैसला लिया गया। पार्टी की विशेष महासभा की बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास आगे भी संस्थापक अध्यक्ष बने रहेंगे।
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पिता-पुत्र के बीच मतभेद
पिछले कुछ महीनों से डॉ. रामदास और उनके बेटे डॉ. अंबुमणि रामदास के बीच नेतृत्व को लेकर विवाद गहराता जा रहा था। दोनों नेता पार्टी के अलग-अलग पदाधिकारियों की नियुक्ति और हटाने जैसे फैसले ले रहे थे। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं में भी बंटवारा दिखाई देने लगा। बताया जा रहा है कि पिता-पुत्र अब आपस में बातचीत तक नहीं कर रहे हैं।
विशेष महासभा की बैठक
इन्हीं हालातों में रविवार को विलुपुरम में डॉ. रामदास की अगुवाई में पार्टी की विशेष महासभा की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे। बैठक के दौरान पूर्व अध्यक्ष और पेननगरम से विधायक जी.के. मणि ने एक प्रस्ताव रखा कि डॉ. रामदास को पार्टी का संस्थापक अध्यक्ष बने रहना चाहिए। यह प्रस्ताव जैसे ही रखा गया, सभा में मौजूद सभी सदस्यों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ उसका समर्थन किया।
कार्यकर्ताओं का समर्थन और नारेबाजी
इस बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने मरुथुवर अय्या (यानी डॉक्टर साहब) के नारे लगाते हुए 86 वर्षीय डॉ. एस. रामदास के पक्ष में माहौल बना दिया। उत्साह और समर्थन देखकर डॉ. रामदास अपनी कुर्सी से खड़े हुए और हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन किया। इसके बाद विधायक जीके मणि ने घोषणा की कि विशेष महासभा ने सर्वसम्मति से यह स्वीकार कर लिया है कि डॉ. एस. रामदास आगे भी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष बने रहेंगे।
2026 में तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव संभव
साल 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु में अगला विधानसभा चुनाव 2026 में संभावित है। फिलहाल, राज्य में डीएमके शासन में हैं। जिसके मुखिया एमके स्टालिन मुख्यमंत्री पद पर और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन डिप्टी सीएम के पद पर बने हुए हैं।