तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि अगर तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो क्या विजय थलापति अपनी सरकार बनाने में सफल हो पाएंगे? राज्य की राजनीति अब तेजी से गठबंधन के नए समीकरणों की ओर बढ़ती दिख रही है।
ताजा मतगणना रुझानों के मुताबिक टीवीके ने लगभग 34.81% वोट शेयर के साथ 109 सीटों पर बढ़त बना ली है, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन 24.11% वोटों के साथ 59 सीटों पर आगे चल रहा है। खास बात यह है कि टीवीके ने दक्षिणी जिलों जैसे मदुरै, तेनकासी और तूतुकुडी में मजबूत पकड़ बनाकर राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। वहीं डेल्टा क्षेत्र और कांचीपुरम में भी पार्टी का प्रभाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
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क्या बनेगा नया गठबंधन?
सूत्रों के मुताबिक, विजय थलपति ने सरकार गठन को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राजनीतिक रणनीतिकार जॉन अरोकीयासामी के साथ चर्चा शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ छोटे दल टीवीके का समर्थन कर सकते हैं, जिनमें कांग्रेस, आईयूएमएल, डीएमडीके और वाम दलों के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर टीवीके बहुमत से चूकता है, तो विजय का अगला कदम गठबंधन सरकार की दिशा में होगा। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन सत्ता की चाबी बन सकता है। पीएमके के कुछ गुटों के समर्थन की संभावना भी जताई जा रही है, खासकर उन सीटों पर जहां वे आगे चल रहे हैं।
राज्यभर में TVK की पकड़ मजबूत
टीवीके ने इस चुनाव में मध्य और दक्षिण तमिलनाडु में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। पार्टी ने न सिर्फ इन क्षेत्रों में बढ़त हासिल की, बल्कि पारंपरिक रूप से कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले कन्याकुमारी में भी सेंध लगाकर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।