डीवीएसी के अधिकारियों ने शनिवार को तमिलनाडु भर में पूर्व डीएमके मंत्री केएन नेहरू से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। जिसकी पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने आलोचना करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया।
कहां हो रही थी तलाशी?
तिरुचिरापल्ली में, जहां नेहरू का घर है और उनके भाई की संपत्तियां हैं, वहां तलाशी ली जा रही थी। नेहरू के घर के बाहर उनके बहुत सारे समर्थक और स्कूल शिक्षा के पूर्व मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी जमा हुए। नेहरू थोड़ी देर के लिए बाहर आए और उनसे पार्टी ऑफिस जाने की अपील की।
क्या है पूरा मामला?
सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (डीवीएसी) चेन्नई समेत कई जगहों पर तलाशी ले रहा था। बताया जा रहा है कि यह तलाशी नगर प्रशासन और जल आपूर्ति मंत्री के तौर पर नेहरू के कार्यकाल में 2,538 लोगों की भर्ती में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी थी।
कौन हैं केएन नेहरू?
नेहरू वर्तमान में तिरुचिरापल्ली पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके के डिप्टी फ्लोर नेता हैं। वे मध्य तमिलनाडु में भी डीएमके के एक प्रमुख नेता हैं। इससे पहले डीवीएसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(सी) और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत डीएमके के प्रधान सचिव नेहरू, उनके भाइयों और कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
एमके स्टालिन ने क्या आरोप लगाया?
इन तलाशी अभियानों की कड़ी निंदा करते हुए स्टालिन ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार चल रहे उच्च न्यायालय के मामले और विधानसभा सत्र के बीच "पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित ध्यान भटकाने वाली रणनीति" का सहारा ले रही है।
'क्या है विपक्ष को डराने का प्रयास है'
एक्स पर एक पोस्ट में, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ये तलाशी अभियान विपक्ष को डराने का प्रयास था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु के लोग मौजूदा प्रशासन की कार्रवाइयों से पूरी तरह अवगत हैं। इसके साथ ही सत्ताधारी दल पर सत्ता हासिल करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे टीवीके सरकार पहले ही नकार चुकी है।
स्टालिन ने कहा, 'तमिलनाडु के लोग भली-भांति जानते हैं कि सरकार बनाने के लिए उन्होंने अन्य दलों के विधायकों को इस्तीफा देने के लिए प्रेरित किया। विधानसभा परिसर में ही उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया।' उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने इस मामले में दर्ज औपचारिक शिकायतों पर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की है।
'भारतीय लोकतंत्र का काला पक्ष'
इन कार्रवाइयों को भारतीय लोकतंत्र का काला पक्ष करार देते हुए, डीएमके अध्यक्ष ने सरकार के कदमों को नियमित राजनीतिक चालबाजी बताकर खारिज कर दिया। इसके साथ ही कहा कि न तो वरिष्ठ नेता नेहरू और न ही डीएमके डरेंगे।
स्टालिन ने कहा, 'हम कानून के अनुसार हर चीज का सामना करेंगे और उस पर विजय प्राप्त करेंगे।' इसके साथ जोर देकर कहा कि पार्टी प्रशासन की कार्रवाइयों को कानूनी रूप से चुनौती देगी।