मध्य प्रदेश और राजस्थान से बच्चों की मौत की खबरें सामने आने के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी पूरे राज्य में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर तुरंत रोक लगा दी। इसके थोक और रिटेल दुकानों के स्टॉक फ्रीज करने के आदेश दिए गए।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में खांसी की दवा (कफ सिरप) ने 11 बच्चों की जान ले ली है। मध्यप्र देश के छिंदवाड़ा में अब तक कुल नौ बच्चों की और राजस्थान के भरतपुर में एक और सीकर में भी एक बच्चे की मौत हो चुकी है। बच्चों की मौत के बाद जांच के घेरे में आए कफ सिरप को अब तमिलनाडु सरकार ने तत्काल उत्पादन रोकने का आदेश दिया है।
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तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने कोल्डरिफ ब्रांड की खांसी की दवा बनाने वाली कंपनी को तत्काल उत्पादन रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब तमिलनाडु सरकारी दवा परीक्षण प्रयोगशाला की जांच में एक बैच की गुणवत्ता मानकों खरी नहीं पाई गई और उसमें डायएथिलीन ग्लायकॉल की मिलावट सामने आई। ड्रग्स कंट्रोल और लाइसेंसिंग अथॉरिटी के उप निदेशक व कंट्रोलिंग अथॉरिटी एस. गुरुभारती ने बताया कि निर्माता को निर्माण लाइसेंस रद्द करने के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एक फैक्ट्री में तैयार किया जाता है। घटना सामने आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जांच रिपोर्ट मांगी थी। आज सुबह आई रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए प्रतिबंध लागू किया है।
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मध्य प्रदेश में नौ मासूमों की मौत
बता दें छिंदवाड़ा के परासिया ब्लॉक के 9 बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ कफ सरिप की वजह से हो गई। इसके अलावा कई बच्चों का इलाज चल रहा है। यह कफ सिरप तिमलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल की यूनिट से सैंपल लिए गए थे। जिसके सैंपल की च में खुलासा हुआ है कि सिरप में नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉन का इस्तेमाल हुआ है। इसमें आशंका व्यक्त की गई कि वह डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित था। यह दोनों ही किडनी को नुकसान पहुचाने वाले जहरीले पदार्थ हैं।