तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश के कई जगहों पर दावा कर रहा है। तीस से अधिक हमारे क्षेत्रों को उसने चीनी नाम दिया है। पीएम मोदी आप इस मामले में क्या बोलेंगे। क्या आपमें श्रीलंका और चीन की निंदा करने की हिम्मत नहीं है। बता दें, चीन ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को मजबूत करते हुए भारतीय राज्य के विभिन्न स्थानों के 30 नामों की चौथी सूची जारी की थी, जिस पर विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताते हुए चीन की आलोचान की थी। उन्होंने कहा था कि सिर्फ नाम गढ़ने से सच्चाई नहीं बदल जाती।
भाजपा ने सहूलियत के अनुसार जानकारी बदली: स्टालिन
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के करीब आते ही भाजपा ने कच्चाथीवू मुद्दे पर राजनीति शुरू कर दी है। पीएम में न तो मछुआरों की गिरफ्तारी को लेकर श्रीलंका की निंदा करने की हिम्मत है और न ही चीनी नामकरण का विरोध करने की तो वे कच्चाथीवू के बारे में कैसे बात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहले तो भाजपा ने कच्चाथीवू पर कोई जवाब नहीं दिया था, उन्होंने कहा था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 2015 में तत्कालीन विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा था कि कच्चाथीवू कभी भी भारत का हिस्सा था ही नहीं। अब चुनाव आ गए हैं, इसलिए उन्होंने अपनी सहूलियत से जानकारी ही बदल दी। यह कलाबाजी क्यों?
स्टालिन ने पूछा- क्या पीएम में श्रीलंका और चीन का विरोध करने का साहस है
स्टालिन ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी आज कच्चाथीवू की बात कर रहे हैं क्या अपने 10 साल के कार्यकाल में उन्होंने मछुआरों की गिरफ्तारी के खिलाफ श्रीलंका की निंदा की। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया। स्टालिन ने पूछा कि क्या उन्होंने चीन की आलोचना की। उनमें चीन का विरोध करने का साहस नहीं। उनमें श्रीलंका का विरोध करने का साहस नहीं है तो वे कच्चाथीवू के बारे में कैसे बात कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या पीएम मोदी ने अपनी श्रीलंका दौरे के दौरान कच्चाथीवू वापस करने की मांग की।
कच्चाथीवू द्वीप कहां है?
कच्चातिवु पाक जलडमरूमध्य में एक छोटा सा द्वीप है, जो बंगाल की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। 285 एकड़ हरित क्षेत्र 1976 तक भारत का था। हालांकि, श्रीलंका और भारत के बीच एक विवादित क्षेत्र है, जिस पर आज श्रीलंका हक जताता है। दरअसल, साल 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने समकक्ष श्रीलंकाई राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के साथ 1974-76 के बीच चार समुद्री सीमा समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इन्हीं समझौते के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया।