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Tamil Nadu: हिंदी कविता न सुनाने पर कक्षा तीन के छात्र की पिटाई, आरोपी शिक्षिका को स्कूल से किया गया निलंबित

Mon, 24 Feb 2025 02:30 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

Tamil Nadu: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक शिक्षिका को कक्षा तीन के छात्र की पिटाई के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, छात्र के हिंदी में कविता न सुनाने पर शिक्षिका ने उसकी पिटाई की थी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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चेन्नई के एक प्रतिष्ठित स्कूल की शिक्षिका को कक्षा तीन के छात्र को हिंदी कविता न सुनाने पर पीटने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। मामले में स्कूल प्रबंधन ने सोमवार को बताया कि 21 फरवरी को हुई जांच के बाद शिक्षिका को निलंबित करने का फैसला लिया गया। स्कूल के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'यह मामला हमें 23 फरवरी, शुक्रवार को पता चला। जांच में यह पाया गया कि शिक्षिका ने छात्र को पीटा था, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया।' हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि यह मामला मुख्य रूप से छात्र के माता-पिता और शिक्षिका के बीच का है।  
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माता-पिता ने जताई आपत्ति  
घटना के बाद छात्र के माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन से इसकी शिकायत की। यह मामला भवन राजाजी विद्यालयम नाम के सीबीएसई स्कूल का है, जो अपने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हिंसा को सख्ती से प्रतिबंधित करता है। शिक्षिका के खिलाफ की गई कार्रवाई स्कूल के दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जो किसी भी प्रकार की शारीरिक, मौखिक या मानसिक प्रताड़ना को सख्ती से रोकने पर जोर देता है।

स्कूल की नीति: दंड नहीं, प्रोत्साहन  
इस स्कूल में छात्रों को किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा देना सख्त वर्जित है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों पर शारीरिक या मानसिक दबाव डालने के बजाय, उन्हें सकारात्मक तरीके से प्रोत्साहित करना चाहिए।
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स्कूलों में शिक्षकों के लिए सख्त नियम
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं, जिनमें छात्रों के साथ संवेदनशीलता और सहनशीलता से पेश आने की सलाह दी जाती है। अगर कोई शिक्षक इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।  

घटना को लेकर आम लोगों में आक्रोश
यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। मामले में कई अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन के फैसले की सराहना की है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि शिक्षकों को भी उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे बच्चों के साथ धैर्य और समझदारी से पेश आएं।
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