गौरतलब है कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा करुणानिधि और जयललिता के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन इस बार इन दोनों के बिना चुनाव हो रहे हैं। वैसे तो राज्य में इस बार भी चुनावी मुकाबला एआईएडीएमके और डीएमके के बीच है, लेकिन युवा मतदाता कमल हासन और टीटी दिनाकरन की ओर भी रुख कर सकते हैं। तमिलनाडु में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों का भविष्य राज्य के क्षेत्रीय दलों पर निर्भर है।
बता दें कि तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके ने गठबंधन किया है। एआईएडीएमके 179 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाजपा के 20 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। उधर, कांग्रेस और डीएमके मिलकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। डीएमके 173 तो कांग्रेस 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बाकी सीटों पर दोनों ही गठबंधन के सहयोगी दलों के उम्मीदवार उतरे हैं। इसके अलावा टीटी दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम तीसरे मोर्चे का गठन करके मैदान में उतरी है, जो 161 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बता दें कि दिनाकरन शशिकला (जयललिता की करीबी) के भतीजे हैं। उधर, कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि माइम 142 सीटों पर किस्मत आजमा रही है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के संयुक्त समन्वयक ईके पलानीस्वामी सेलम जिले के इडप्पाडी विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर मैदान में हैं। उनका सीधा मुकाबला डीएमके के युवा नेता टी संपत कुमार से है। वहीं, राज्य के डिप्टी सीएम ओ पन्नीरसेल्वम बोडिनायाकन्नूर विधानसभा सीट से किस्मत आजमा रहे हैं, जिनकी टक्कर डीएमतके के थंगा तमिलसेल्वन से है। थाउजेंड लाइट्स सीट से भाजपा ने फिल्म अभिनेत्री खुशबू सुंदर को उतारा है, जिनके खिलाफ डीएमके के एन. एझिहन ताल ठोंक रहे हैं।
गौरतलब है कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन कोलाथुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके खिलाफ एआईएडीएमके के अधिराजराम और एमएनएम के ए जगदीश मैदान में हैं। वहीं, चेपॉक विधानसभा सीट पर भी हर किसी की नजरें बनी हुई हैं। यहां डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि चुनावी मैदान में उतरे हैं। उन्हें एनडीए की ओर से पीएमके के ए. कसाली चुनौती दे रहे हैं। शशिकला भले ही सियासत से संन्यास ले चुकी हैं, लेकिन उनके भतीजे दिनाकरन चुनावी मैदान में हैं। दिनाकरन कोविलपट्टी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला तमिलनाडु सरकार के मंत्री और एआईएडीएमके उम्मीदवार के राजू और डीएमके गठबंधन के श्रीनिवासन से है।
जानकारी के मुताबिक, एआईएडीएमके पिछले 10 साल से तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज है। एआईएडीएमके की पहचान जयललिता 'अम्मा' से रही, लेकिन 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिलने के कुछ महीनों बाद ही उनका निधन हो गया। ऐसे में तमिलनाडु में पहले पन्नीरसेल्वम मुख्यमंत्री बने और इसके बाद जयललिता की करीबी शशिकला ने पार्टी की कमान अपने हाथों में ले ली। उन्होंने अपने वफादार पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया। बाद में शशिकला ने खुद मुख्यमंत्री बनने की कोशिश शुरू की और उनके शपथ ग्रहण की तारीख भी तय हो गई, लेकिन भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया और चार साल जेल की सजा हो गई। शशिकला के जेल जाने के बाद केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दो गुटों में बंटे एआईएडीएमके को एक किया। साथ ही, पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम के बीच समझौता करा दिया। इसके बाद केंद्र पर तमिलनाडु सरकार चलाने के आरोप भी लगे।
एआईएडीएमके में हुई उठापटक को डीएमके प्रमुख स्टालिन ने तमिलनाडु की अस्मिता का मुद्दा बनाया, जिसका फायदा उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में हुआ। उस दौरान तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से 38 सीटें यूपीए के खाते में गईं, जबकि एनडीए को महज एक सीट मिली। डीएमके उसी सफलता का स्वाद अब विधानसभा चुनावों में भी चखने की तैयारी कर रही है।
गौरतलब है कि रजनीकांत ने पहले चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन बाद में तबीयत का हवाला देते हुए फैसला बदल लिया। ऐसे में तमिलनाडु में सीधा मुकाबला एआईएडीएमके और डीएमके के बीच रह गया। अब मतदाताओं के लुभाने के लिए एआईएडीएमके ने मुफ्त में वॉशिंग मशीन, इलेक्ट्रिक कुकर, साल में छह गैस सिलेंडर, केबल कनेक्शन और हर परिवार में एक व्यक्ति को रोजगार देने का वादा किया है। उधर, डीएमके ने पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दूध के दाम कम करने का वादा किया तो विद्यार्थियों को लैपटॉप देने का भी भरोसा दिलाया।
बता दें कि एमएनएम नेता और अभिनेता कमल हासन भी 2021 में चुनावी मुकाबले में उतरे हैं। वह कोयम्बटूर दक्षिण से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जो पश्चिमी क्षेत्र का हिस्सा है। यह इलाका एक समय में एआईएडीएमके का गढ़ माना जाता था। कोयम्बटूर, इरोड, तिरुपुर, सलेम और नमक्कल जिलों के अलावा पश्चिमी क्षेत्र में एआईएडीएमके का अच्छा-खासा प्रभाव रहा है, लेकिन स्टालिन ने इन जिलों में पकड़ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लोकसभा चुनाव में तो डीएमके ने पश्चिमी क्षेत्रों की सभी सीटों पर क्लीन स्वीप किया था। ऐसे में विधानसभा चुनाव की सियासी जंग काफी रोचक हो गई है।