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Ground Report: प्राचीन शहर की आधुनिक समस्याएं, तय करेंगी सियासत की स्याही का रंग

सार

देश में सबसे ज्यादा मंदिरों वाले राज्य तमिलनाडु की टेम्पल सिटी मदुरै में इस विधानसभा चुनाव में अनुभवी बनाम नए चेहरे के बीच मुकाबला है। चुनाव में मुद्दे ट्रैफिक, पानी और बेरोजगारी है। हालांकि यह मंदिर सिटी अब सबसे गंदे शहर के रूप में जाना जाता है। तो आइए जानते हैं मदुरै की ग्राउंड रिपोर्ट क्या कहती है...
 
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मदुरै में छह विधानसभा सीटों पर चुनाव, सियासी दलों के बीच लड़ाई रोचक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु वह राज्य है, जहां देश में सबसे ज्यादा मंदिर हैं। लगभग 79 हजार। इनमें से 44 हजार तो सरकार के एचआर सीआई विभाग के नियंत्रण में आते हैं। इस राज्य में आस्था की राजधानी कहलाता है मदुरै शहर। संकरी गलियों। उनके किनारों पर जरदोजी की तरह सजी सफेद मोगरे और चमेली की बेहिसाब दुकानें। उसी से थोड़ा दूर कई दर्जन सिलाई मशीन एक सीध में तैनात। उन पर सिलतीं देवताओं के लिए रंग बिरंगी पोशाक। चाशनी की खुशबू वाले तमाम भोग। दूर से नजर आनेवाला मंदिर का शिखर। और इस सबके बीच शंख ध्वनि के बीच से चीरती हुई चुनाव प्रचार वाली गाड़ियों।  
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यह वह इलाका है, जहां से डीएमके के सबसे मशहूर मंत्री पीटीआर चुनाव लड़ रहे हैं। पीटीआर तीसरी पीढ़ी हैं जो इस शहर से चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे तो डीएमके खुद को तर्कवादी पार्टी मानती है और मंदिर-मस्जिद के हवाले राजनीति नहीं करने के दम भरती है। पर, चुनाव प्रचार के लिए पीटीआर मंदिर भी जाते हैं और मस्जिदों में मीटिंग भी कर रहे हैं। धार्मिक शहर में विपक्ष के धर्म वाले मुद्दे पर कैसे पार पाएंगे…, इस सवाल का जवाब देते कहते हैं, जितने मंदिर डीएमके ने बनवाएं, संवारे उतने किसी पार्टी ने नहीं किए। यह भी बताते हैं कि उनकी मां मीनाक्षी मंदिर की पहली महिला चेयरपर्सन हैं। उनके पिता हर हफ्ते मीनाक्षी मंदिर में पूजा करते रहे हैं। उनके माथे मंदिर की भभूत और चंदन हर सुबह सज जाता है।

यह चुनाव तब और खास हो जाता है जब उनके मुकाबले डायरेक्टर सुंदर सी मैदान में हैं। वह एनडीए के कैंडिडेट हैं, अन्नाद्रमुक की दो पत्ती उनका चुनाव चिह्न है और भाजपा की नेता खुशबू सुंदर उनकी पत्नी हैं। सुंदर अपने भाषण में स्थानीय मुद्दों और मसलों पर बात करते हैं। पीटीआर जहां राजशाही वाली राजनीति और डीएमके पार्टी का नेशनल चेहरा है, वहीं सुंदर किसी जमीनी नेता का उदाहरण। मुकाबला अनुभवी बनाम नए चेहरे के बीच है। मुद्दे मंदिर, ट्रैफिक, पानी और बेरोजगारी हैं।
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मदुरै में विधानसभा की 6 सीटें हैं 
ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ, साउथ, सेंट्रल और थिरुपरनकुंड्रम। 2021 में 4 सीटें डीएमके ने जीती थीं और 3 अन्नाद्रमुक के हिस्से आई थीं। एक सीट नॉर्थ पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी और एक सीट थिरुपरंकुन्द्रम से डीएमके ने खुद न लड़कर सीपीआईएम को चुनाव लड़ाया था। इस बार मदुरै की दो सीटों पर डीएमके के मंत्री उम्मीदवार हैं। सबसे हाई प्रोफाइल सीट है मदुरै सेंट्रल। यहां डीएमके के सबसे मजबूत मंत्री और नेता पीपलानीवेल थियागराजन पीटीआर चुनाव लड़ रहे हैं। मदुरै ईस्ट से कमर्शियल टैक्स मिनिस्टर पी मूर्ति मैदान में हैं। वेस्ट से अन्नाद्रमुक के सेलूर के राजू चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं। हिंदु-मुस्लिम राजनीति के हॉटस्पॉट थिरुपरंकुन्द्रम से अन्नाद्रमुक के मजबूत और पुराने नेता वीवी राजन चेलप्पा तीसरी बार लड़ रहे हैं। मीनाक्षी मंदिर इस मदुरै सेंट्रल सीट या फिर पूरे शहर भर की आस्था और अर्थव्यवस्था की धुरी है। मंदिर के आसपास बसे कई सौ व्यापारियों के लिए यह चुनाव उम्मीदों की बारहखड़ी है।

राजेश अग्रवाल कई पीढ़ी पहले राजस्थान से आकर यहां बसे थे। तब से परिवार साड़ियों का व्यापार करता है। राजेश कहते हैं पर्यटन तो है लेकिन खरीददार नहीं। लोग सुविधा चाहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ गंदगी और भीड़ मिलती है।
वरिष्ठ पत्रकार शब्बीर अहमद कहते हैं पीटीआर का चुनाव अद्भुत बन गया है। जो दुनिया की इकोनॉमी से नीचे बात करना पसंद नहीं करते थे, अब पानी, सीवेज और कचरे का जिक्र करना उनकी मजबूरी बन गया है। इसका एक ही कारण है, उनके खिलाफ खड़े उम्मीदवार ने स्थानीय मसलों को बड़ा मुद्दा बनाया है। सबसे पुराने शहर की पहचान वाला मदुरै अब सबसे गंदे शहर के रूप में जाना जाता है। यहां रहने वालों को इसका दुख है।

हार्वर्ड से पढ़े, वॉल स्ट्रीट में बैंकर रहे राज्य के पूर्व वित्त मंत्री, मौजूदा आईटी मिनिस्टर और दो बार और तीसरी पीढ़ी के विधायक का मुकाबला बीकॉम की पढ़ाई करने वाले फिल्म डायरेक्टर और राजनीति के नौसिखिए के बीच है। मुकाबला हिंदी पर डीएमके के विरोध की पैरवी करने वाले नेता और मदुरै में गंदगी की परतें खोलने वाले उम्मीदवार के बीच है।

चुनावी आंकड़ों का गणित
चुनावी आंकड़ों की मानें तो ये सीट मतदाताओं के मूड पर निर्भर करती है। 2011 में डीएमके इस सीट पर बुरी तरह हारी थी, 2016 में मुश्किल से जीती थी और 2021 में बहुत बड़ी जीत लेकर सरकार में आई थी। 2016 में जो जीत का अंतर 5 हजार वोट था वो 2021 में 34 हजार हो गया। और अगर पूरे मदुरै की सभी 6 सीटों की बात करें तो 2016 में एआईएडीएमके का दबदबा था, 2016 में डीएमके एंट्री करने लगी थी और 2021 में 6 में से 4 सीटें डीएमके ने जीत ली थी।
मतलब यहां वोटर, मसले और उम्मीदवार फैसला करते हैं। यही वजह है कि प्राचीन शहर की आधुनिक समस्याएं और उम्मीदवारों का बहीखाता ही इस बार सियासत की स्याही का रंग तय करेगी।
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