तमिलनाडु में कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी
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तमिलनाडु में पिछले 10 साल से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) का शासन है। राज्य की जनता ने वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता को दोबारा गद्दी सौंपी थी। भारतीय जनता पार्टी, अन्नाद्रमुक की प्रमुख सहयोगी है। छह अप्रैल को एक चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू हो चुकी है। जल्द ही इस मुद्दे पर सहमति बनने की उम्मीद है।
पिछले चुनाव में विधानसभा की कुल 234 सीटों में अन्नाद्रमुक को 135 पर विजय हासिल हुई थी, जबकि भाजपा का खाता भी नहीं खुल सका था। इस बार दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी अपने लिए 60 सीट की मांग कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एम चक्रवर्ती की मानें तो पार्टी ने उन 60 सीटों की पहचान कर ली है, जहां पर जीत का भरोसा है।
भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी, वीके सिंह, राष्ट्रीय महासचिव एवं तमिलनाडु राज्य के पार्टी प्रभारी सीटी रवि, पार्टी प्रदेश अध्यक्ष एल मुरुगन सहित भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री एवं अन्नाद्रमुक के समन्वयक के पलानीस्वामी और अन्नाद्रमुक समन्वयक एवं उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम से चर्चा की। भाजपा के राज्य में संगठन महासचिव केशव विनायगन भी इस बातचीत के दौरान मौजूद रहे।
एक्टिंग से राजनीति में आए विजयकांत की पार्टी देसिया मुरपोक्कू द्रविड कड़गम (द्रमुक) और जीके वासन की तमिल मनीला कांग्रेस भी अन्नाद्रमुक की सहयोगी हैं। इस बीच, ऑल इंडिया समातुवा मक्कल काची के संस्थापक एवं करीब एक दशक से अन्नाद्रमुक के सहयोगी रहे आर शरत कुमार कमल हासन की पार्टी मक्कल निधी मैय्यम से गठबंधन की संभावना के लिए शनिवार को चर्चा करेंगे।
तमिलनाडु के राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नाद्रमुक और द्रमुक दोनों ही इस चुनाव में अपने सहयोगी दलों से ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहते हैं। उनका मकसद मौका मिलने पर अकेले अपने दम पर सरकार बनाना है। बताया जाता है कि वहां डीएमके अपने लिए 180 सीटें रखना चाहती है, जबकि शुरू में 60-70 सीटें चाहने वाली कांग्रेस अब 40-48 सीटें मांग रही है। पिछले चुनाव में स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी द्रमुक 88 सीटों पर जीत के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी और कांग्रेस को सिर्फ आठ सीटें ही मिली थी।