चार दशक बीत जाने के बाद एक बार फिर तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में दो अभिनेताओं के बीच मुकाबला देखा जा रहा है। एक दौर था एमजीआर और शिवाजी गणेशन का बड़ा प्रशंसक आधार था, लेकिन राजनीतिक दौड़ में शिवाजी दौड़ में हार गए थे। शिवाजी को उनके प्रशंसकों ने एक महान एक्टर का दर्जा तो दिया लेकिन उनकी राजनीतिक छवि का समर्थन नहीं किया।
उस दौर के बाद अब फिर दो सुपरस्टार्स के बीच वैसी ही प्रतिस्पर्धा दिख रही है। कुछ महीने पहले कमल हासन ने राजनीति में आने का फैसला किया था। इसके बाद उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी
रजनीकांत ने भी राजनीति में आने का ऐलान कर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि रजनी-कमल का राजनीति में कदम रखना एमजीआर और शिवाजी गणेशन जैसी ही घटना है। मौजूदा समय में रजनी को एमजीआर तो कमल को शिवाजी कहा जा सकता है। द्रविड़ के विद्वान आर कन्नन का मानना है कि तमिलनाडु में रजनीकांत के पास प्रशंसकों का एक बहुत बड़ा वर्ग है। खास बात यह है कि वो जनता के लिए सुलभ, साधारण और एक सरल शख्स हैं। वहीं कमल शानदार और ईमानदार व्यक्ति हैं लेकिन राजनीति में पार पा पाना उनके लिए चुनौती साबित होगा।
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गौरतलब है कि रजनीकांत के राजनीति में आने की घोषणा के बाद सभी दलों के बीच तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि रजनीकांत उनके साथ जुड़ें। पार्टी चाहती है कि रजनीकांत आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन में प्रचार करें। अगर रजनीकांत ने ऐसा किया तो तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव नजर आ सकता है। इससे पहले तमिलनाडु में दशकों से पैर जमाने की कोशिश कर रही भाजपा कई बार उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्योता दे चुकी है।