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अफगानिस्तान: तालिबान को राष्ट्रपति अशरफ गनी पर क्यों नहीं है भरोसा? कर रहा है हटाने की बात

Mon, 26 Jul 2021 05:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति अशरफ गनी को तालिबान और उसका नेतृत्व पसंद नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर रखने वाले पूर्व राजनयिक एके शर्मा का कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता का मुख्य केंद्र बनना चाहता है...
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अशरफ गनी - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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शांति वार्ता के जरिए शांति प्रक्रिया की बहाली और राजनीतिक समाधान से अफगानिस्तान में खुशहाली लाने की बात करने वाले तालिबान की नई मांग ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। तालिबान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का इस्तीफा चाहता है और सत्ता के नए प्रधान का चयन चाहता है। उसकी इस मांग ने अफगानिस्तान की शांतिवार्ता में शामिल नेताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सकते में डाल दिया है। इसके समानांतर तालिबान ने अफगान सुरक्षा बलों समेत अन्य पर पहले से अधिक घातक तरीके से हमले कर रहा है।

तालिबानी क्यों कर रहे है अशरफ गनी को सत्ता से हटाने की मांग?

राष्ट्रपति अशरफ गनी को तालिबान और उसका नेतृत्व पसंद नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर रखने वाले पूर्व राजनयिक एके शर्मा का कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता का मुख्य केंद्र बनना चाहता है। तालिबान जिहाद और इस्लामिक कानून पर भरोसा रखता है। दूसरे राष्ट्रपति अशरफ गनी को तालिबान के नेता अपने रास्ते में बड़ा रोड़ा मानते हैं। चाहे अशरफ गनी हों या पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई दोनों शीर्ष नेताओं को तालिबान के लोग अमेरिका का पिछलग्गू मानते हैं। अफगानिस्तान पर शोध कर रहे सुधीर मिश्रा कहते हैं कि तालिबान की इच्छा काबुल पर काबिज होने की है। वह कंधार, हेरात, काबुल से लेकर ट्रेड और कारोबार के रूट पर अधिकार चाहता है। यह अब्दुल गनी के राष्ट्रपति रहते हुए संभव नहीं है। इसलिए तालिबान की योजना इस बार पहले की तुलना में थोड़ी जटिल दिखाई दे रही है।

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सुहैल शाहीन तालिबान के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। शांति वार्ता प्रक्रिया में शामिल हैं और उसके सदस्य हैं। सुहैल शाहीन ने भी संगठन की तरफ से राय व्यक्त की है। शाहीन ने कहा है कि तालिबान को सत्ता में एकतरफा अधिकार मंजूर नहीं है। शाहीन ने अपने एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति गनी की सरकार के सत्ता से जाते ही तालिबान के लोग हथियार डाल देंगे। इसके बाद देश में संघर्ष में शामिल लोगों के सहयोग से बनी सरकार देश की सत्ता संभालेगी। ताकि अफगानिस्तान में एकाधिकार की समाप्ति हो सके।

सभी की निगाह अमेरिका पर टिकी

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाह अमेरिका के अगले कदम पर टिक गई है। एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों के पास संसाधनों का काफी अभाव है। पूर्व विदेश सचिव शशांक भी मानते हैं कि तालिबान के खिलाफ लड़ने वाले सुरक्षा बलों या अफगानिस्तान के अन्य समूह के पास हथियार, तकनीक और संसाधन की कमी है। इसलिए अफगान आर्मी के जवान भी तालिबान से पूरी ताकत से नहीं लड़ पा रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि अमेरिका किस तरह की रणनीति को अंतिम रूप देता है।
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