शांति वार्ता के जरिए शांति प्रक्रिया की बहाली और राजनीतिक समाधान से अफगानिस्तान में खुशहाली लाने की बात करने वाले तालिबान की नई मांग ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। तालिबान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का इस्तीफा चाहता है और सत्ता के नए प्रधान का चयन चाहता है। उसकी इस मांग ने अफगानिस्तान की शांतिवार्ता में शामिल नेताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सकते में डाल दिया है। इसके समानांतर तालिबान ने अफगान सुरक्षा बलों समेत अन्य पर पहले से अधिक घातक तरीके से हमले कर रहा है।
राष्ट्रपति अशरफ गनी को तालिबान और उसका नेतृत्व पसंद नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर रखने वाले पूर्व राजनयिक एके शर्मा का कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता का मुख्य केंद्र बनना चाहता है। तालिबान जिहाद और इस्लामिक कानून पर भरोसा रखता है। दूसरे राष्ट्रपति अशरफ गनी को तालिबान के नेता अपने रास्ते में बड़ा रोड़ा मानते हैं। चाहे अशरफ गनी हों या पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई दोनों शीर्ष नेताओं को तालिबान के लोग अमेरिका का पिछलग्गू मानते हैं। अफगानिस्तान पर शोध कर रहे सुधीर मिश्रा कहते हैं कि तालिबान की इच्छा काबुल पर काबिज होने की है। वह कंधार, हेरात, काबुल से लेकर ट्रेड और कारोबार के रूट पर अधिकार चाहता है। यह अब्दुल गनी के राष्ट्रपति रहते हुए संभव नहीं है। इसलिए तालिबान की योजना इस बार पहले की तुलना में थोड़ी जटिल दिखाई दे रही है।