एनजीओ ने याचिका में कहा कि दोषी सांसद या विधायक कानून की कमियों का फायदा उठाकर अपने पद पर बने रहते हैं, इसलिए जन प्रतिनिधित्व कानून की कुछ धाराओं को समाप्त किया जाए। कुछ धाराओं की आड़ में दोषी अपील लंबित रहने तक पद पर बना रहता है।
शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई, 2013 को जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) को समाप्त कर दिया था। इसमें प्रावधान था कि दोषी सदस्य तीन महीने के अंदर अपील करता है तो उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता और यह फैसला ऊपरी अदालत का फैसला आने तक जारी रहेगा।
एनजीओ की दलील पर पीठ ने कहा कि उसका फैसला उन आरोपी सदस्यों पर लागू नहीं होता, जो किसी अपराध में सजा सुनाए जाने से पहले ही ऊपरी अदालतों में अपील दायर कर दी हो। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (3) में प्रावधान है कि किसी भी अपराध में यदि दोषी सदस्य को दो वर्ष से ज्यादा की सजा हुई हो तो उसे उस अविधि के लिए अयोग्य करार दिया जाएगा। इसके अलावा उसकी रिहाई के छह वर्ष बाद तक वह चुनाव नहीं लड़ सकता।