फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tahawwur Rana: 'पाकिस्तान में बैठे साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश हो', तहव्वुर के प्रत्यर्पण पर बोली 26/11 की पीड़ित

Thu, 10 Apr 2025 03:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

26 नवंबर, 2008 को हुए मुंबई हमलों के दौरान देविका महज नौ साल की उम्र में दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर फंस गई थीं। आतंकियों की गोलीबारी में उनके पैर में गोली लगी। कसाब के मुकदमे में उनकी गवाही अहम साबित हुई थी, जिसे बाद में मुंबई की एक अदालत ने दोषी ठहराया। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई।
विज्ञापन
तहव्वुर हुसैन राणा, 26/11 आतंकवादी हमले का आरोपी - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों की बाल-बाल बची एक महिला देविका रोटावन ने आतंकी तहव्वुर राणा पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने गुरुवार को कहा कि अमेरिका से मुख्य आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण भारत के लिए बड़ी जीत है। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान में छिपे अन्य षड्यंत्रकारियों का भी पर्दाफाश किया जाए और उन्हें कड़ी सजा दी जाए।

विज्ञापन


तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण के बारे में बात करते हुए रोटावन (अब 25 वर्ष उम्र) ने कहा, 'वह खुश है कि भारत को आतंकवादी हमलों के साजिशकर्ताओं में से एक को देश में न्याय का सामना करने का मौका मिला है।' रोटावन ने पीटीआई से कहा, 'यह भारत के लिए एक बड़ी जीत है और मैं इस उपलब्धि के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं। तहव्वुर को न्याय का सामना करने के लिए भारत लाए जाने से भारत में आतंकवाद के अंत की शुरुआत हुई है।' उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को तहव्वुर से पूछताछ के दौरान और अधिक जानकारी जुटानी चाहिए और पाकिस्तान में अभी भी छिपे सभी आतंकवादियों को बेनकाब करना चाहिए।

यह भी पढ़ें- 'ये देश के लिए बड़ा दिन, फांसी दी जाए', तहव्वुर के प्रत्यर्पण पर बोले मुंबई हमले के हीरो के भाई
विज्ञापन


'तहव्वुर राणा को मृत्युदंड मिलना चाहिए'
पीड़ित ने कहा, 'तहव्वुर राणा को मृत्युदंड मिलना चाहिए, लेकिन जो अब भी पाकिस्तान से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, ऐसे लोगों का उकसा रहे हैं और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं, उन्हें भी सख्त सजा मिलनी चाहिए।'

भयावह रात को याद कर सहमी देविका
26 नवंबर, 2008 को देविका रोटावन अपने पिता और भाई के साथ पुणे जा रही थी और प्लेटफॉर्म नंबर 12 और 13 के बीच ट्रेन का इंतजार कर रही थी, तभी भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर हमला हुआ। उस भयावह रात को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'मैंने एक आदमी को अपने हाथ में एक बड़ी बंदूक लेकर यात्रियों पर गोलियां चलाते देखा। मैंने कई शव और घायल यात्री देखे। मैं तब सिर्फ नौ साल की थी। मुझे नहीं पता था कि मेरी आंखों के सामने क्या हो रहा था। वह शख्स कसाब ही था।' गोलीबारी में घायल होने के बाद रोटावन बेहोश हो गई और उसे पहले पास के सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। यहां से उसे मध्य मुंबई में सरकारी जे.जे. अस्पताल रेफर कर दिया गया। उनके पैर की छह सर्जरी हुईं।

यह भी पढ़ें- 26/11 हमले के बाद कैसे पकड़ा गया तहव्वुर राणा, भारत प्रत्यर्पण से पहले क्या-क्या हुआ?
विज्ञापन


'कसाब और अबू इस्माइल को यात्रियों पर गोलियां चलाते देखा'
उन्होंने बताया कि मैंने कसाब को यात्रियों पर गोलियां चलाते देखा और मेरे पिता ने कसाब और अबू इस्माइल (एक और आतंकी, जिसे सुरक्षा बलों ने मार गिराया) दोनों को देखा। 10 जून, 2009 को हम ट्रायल कोर्ट गए, जहां हमने कसाब की पहचान की।

पूरी कहानी समझिए
तहव्वुर राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है। आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाउद गिलानी का करीबी सहयोगी है। 16 साल से भी अधिक समय पहले भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अरब सागर के समुद्री मार्ग के जरिए मुंबई में घुसपैठ की। उन्होंने सीएसएमटी, दो लक्जरी होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया। लगभग 60 घंटे तक चले आतंकी हमले में अमेरिकी नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए थे।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें