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तब्लीगी जमात मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की विदेशियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर

Sat, 22 Aug 2020 01:45 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने तब्लीगी जमात के 29 विदेशी सदस्यों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द कर दिया है। मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस टीवी नलवाड़े और जस्टिस एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने  कहा कि मार्च में दिल्ली में आयोजित तब्लीगी जमात कार्यक्रम में शामिल होने वाले विदेशी नागरिकों को ‘बलि का बकरा’ बनाया गया था। इन पर आरोप लगाया गया था कि वे कोविड-19 को फैलाने के लिए जिम्मेदार थे।

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पीठ ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में दिशा-निर्देशों पर काम किया, वहीं राज्य सरकार ने राजनीतिक मजबूरी के तहत काम किया। पीठ ने कहा कि दिल्ली की मरकज में शामिल होने वाले विदेशियों के खिलाफ बड़े स्तर पर दुष्प्रचार किया गया। कोर्ट ने कहा कि जब भी कोई महामारी या आपदा आती है तो सरकार किसी को बलि का बकरा बनाने के लिए ढूंढती है। परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे में संभावना है कि इन विदेशी नागरिकों को बलि का बकरा बनाने के लिए चुना गया है।

धार्मिक गतिविधि के खिलाफ प्रचार अनुचित था। यह गतिविधि पिछले 50 सालों से भी ज्यादा समय से चल रही है और साल भर चलती है। भारत में कोविड-19 के संक्रमण के हालात और ताजा आंकड़े बताते हैं कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। अभी वक्त है कि संबंधित पक्ष को अपनी कार्रवाई पर पश्चाताप करना चाहिये और कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिये ताकि इसकी क्षतिपूर्ति की जा सके।
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इसके साथ ही पीठ ने पूछा कि क्या भारत के लोग वास्तव में मेहमानों का स्वागत करने की अपनी महान परंपरा और संस्कृति के अनुसार काम कर रहे हैं। महामारी द्वारा उत्पन्न स्थिति के दौरान, हमें अधिक सहिष्णुता दिखाने की जरूरत है और अपने मेहमानों के प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है, खासकर वर्तमान याचिकाकर्ताओं की तरह। ऐसे समय में हमने उनकी मदद करने के बजाय उन पर आरोप लगाते हुए जेल में डाल दिया। खंडपीठ ने तीन अलग-अलग याचिका की सुनवाई की, जिसे आइवरी कोस्ट, घाना, तंजानिया, बेनिन और इंडोनेशिया जैसे देशों के लोगों ने दायर की थी।

कोर्ट ने कहा, कोरोना के कारण बनी स्थिति में विदेश नागरिकों के प्रति उदार होना चाहिए था लेकिन उन्हें जेल में बंद कर दिया गया। सरकार विभिन्न देशों के विभिन्न धर्मों के लोगों से अलग-अलग व्यवहार नहीं कर सकती। फैसले के अंत में जस्टिस सेवलीकर कहा, वह एफआईआर रद्द करने से सहमत हैं लेकिन जस्टिस नलवड़े की गई कुछ टिप्पणियों से अलग विचार रखते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन टिप्पणियों से असहमत हैं।

गौरतलब है कि इन 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ तबलीगी जमात मरकज में शामिल होने पर पर्यटन वीजा के नियमों के कथित उल्लंघन, महामारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी कानून उल्लंघन के तहत केस दर्ज किए गए थे। पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को शरण देने के लिए छह भारतीय नागरिकों और मस्जिदों के ट्रस्टियों पर भी मामला दर्ज किया था।

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