खान पान में बढ़ते कीटनाशक इंसान को बीमार कर रहा है। जब पेस्टीसाइड सीधेतौर पर किसान को प्रभावित करने लगे तो किसान एक बदलाव की लकीर खींचते हैं। सैय्यद गनी खान कर्नाटक के ऐसे ही किसान हैं जो चावल का म्यूजियम बनाना चाहते हैं।
उनके पास 800 से अधिक धान की वैरायटी है जबकि 140 आम की किस्में हैं। आम को खाने पर कुछ आमों में संतरे की तो किसी में केला का स्वाद आता है। इन सबमें चौंकाने वाली बात यह है कि सैय्यद ऑर्गेनिक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
कर्नाटक के मंडया के किरुगवलू गांव के सय्यद को प्लांट जिनोम सेवियर सम्मान से सम्मानित किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि गनी को किसानी में जरा भी रुचि नहीं थी, लेकिन पारिवारिक स्थितियों की वजह से वो वापस घर लौटे और किसानी को अपना करियर बनाया।
एक दिन सैय्यद फसल में पेस्टीसाइड डाल रहे थे कि तभी रसायनों की महक की वजह से वो बेहोश हो गए। उन्होंने सोच लिया कि अब वो फसलों में पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं करेंगे। और उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना शुरू किया।