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वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा कद: स्वीडन के राजदूत ने की तारीफ, चार साल की उपलब्धियों में किन बातों का जिक्र?

Fri, 07 Aug 2026 11:49 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली

सार

स्वीडन के निवर्तमान राजदूत जान थेसलेफ ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारत-स्वीडन रणनीतिक साझेदारी और 2030 तक व्यापार दोगुना होने की उम्मीद जताई।
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जान थेसलेफ, स्वीडन के निवर्तमान राजदूत - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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स्वीडन के निवर्तमान राजदूत जान थेसलेफ ने कहा है कि भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी उचित जगह बना ली है। अपने चार साल के कार्यकाल के समापन से पहले एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने भारत और स्वीडन के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाने को हाल के वर्षों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने अपने कार्यकाल के चार वर्षों को बेहद शानदार बताते हुए कहा कि इस दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क, व्यापार, नवाचार और रणनीतिक सहयोग में अभूतपूर्व विस्तार हुआ।

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क्या भारत-स्वीडन संबंधों में हर क्षेत्र में सहयोग गहरा हुआ है?
थेसलेफ ने कहा कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि दोनों देशों के संबंधों का कई क्षेत्रों में विस्तार और मजबूती है। उन्होंने कहा कि आज भारत और स्वीडन के बीच राजनीतिक संवाद अधिक सक्रिय है। इस दौरान स्वीडन से भारत के कई दौरे हुए और भारत के प्रधानमंत्री की स्वीडन यात्रा भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही।

उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताओं के पूरा होने और भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने को भी प्रमुख उपलब्धि बताया। इसके लिए 2026 से 2030 तक की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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क्या वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका पहले से मजबूत हुई है?
भारत में पिछले चार वर्षों में आए बदलाव का जिक्र करते हुए स्वीडिश राजदूत ने कहा कि अस्थिर होते अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने जी20 की अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ से जुड़ी पहलों और एआई से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने जिस तरह वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत की है, वह उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

क्या भारत-ईयू एफटीए सिर्फ व्यापार तक सीमित रहेगा?
थेसलेफ ने भारत-ईयू एफटीए को केवल व्यापार समझौता मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगा और भारत व यूरोप की छोटी एवं मध्यम कंपनियों के लिए नए अवसर खोलेगा। नियामकीय और शुल्क संबंधी बाधाएं कम होने से दोनों क्षेत्रों की नवाचार आधारित कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी।

क्या 2030 तक भारत-स्वीडन व्यापार दोगुना से भी ज्यादा हो सकता है?
द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश 2030 तक व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं और संभव है कि इससे भी आगे निकल जाएं। उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, छात्रों, पर्यटकों और शैक्षणिक सहयोग को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन यह लक्ष्य कम साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार करीब 7-8 अरब डॉलर है और 2030 तक इसके 14-15 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

क्या अंतरिक्ष सहयोग भी भारत-स्वीडन संबंधों की बड़ी ताकत है?
निवर्तमान राजदूत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और स्वीडन का अंतरिक्ष सहयोग 1980 के दशक से जारी है। स्वीडन भारत के आगामी शुक्र मिशन में भी भाग ले रहा है। स्वीडन की हाई-टेक कंपनियां चंद्रयान मिशनों में योगदान दे चुकी हैं और भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में आगे भी सहयोग जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में विकसित तकनीकें केवल अंतरिक्ष अभियानों के लिए नहीं, बल्कि धरती पर सतत विकास के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

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