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Monsoon Session: क्या टूटने वाला है संसद में जारी गतिरोध, सभापति के निर्देश के बाद विपक्ष क्यों खुश?

सार

संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष को नई उम्मीद मिली है। राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्यमंत्री से विपक्ष की भावनाएं गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंचाने को कहा है। विपक्ष चाहता है कि जंतर-मंतर घटना पर गृह मंत्री सदन में बयान दें। क्या इस निर्देश के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव खत्म होगा? क्या अगले सप्ताह संसद की कार्यवाही सामान्य हो पाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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सरकार और विपक्ष के बीच टकराव खत्म होगा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अगले सप्ताह संसद में सरकार और विपक्ष के बीच में गतिरोध टूटने के आसार हैं। 12 अगस्त को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में एफसीआरए संसोधन विधेयक-2026 पेश कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले विपक्ष गृहमंत्री को सदन में बुलाने की पूरी जोर अजमाइश कर रहा है। सभापति सीपी राधाकृष्णन के एक दिशा-निर्देश ने उसे मानो संजीवनी दे दी।
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शुक्रवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान सदस्य अपनी बात रख रहे थे। विपक्ष के सांसद पवन खेड़ा समेत अन्य सदस्य केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुए बल प्रयोग पर जवाब देने की मांग पर अड़े थे। विपक्षी सदस्यों के हंगामे, नारेबाजी शोर-शराबे के बीच राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने आसन से इसे गंभीरता से लेने का आग्रह किया।

नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री के सदन में न आने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हम आसन से अनुरोध करते हैं कि वह गृह मंत्री को सदन में आकर बयान देने का निर्देश दें। खरगे ने कहा कि विपक्ष चर्चा करने के लिए तैयार है। खरगे ने विपक्ष के व्यवधान को जायज बताया और कहा कि जब हम जायज सवाल पूछ रहे हैं तो वह बच रहे हैं। इससे पहले भी खरगे ने सदन में मुद्दा उठाते हुए कहा था कि आखिर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री क्यों छिप रहे हैं। उन्हें सदन में आकर जवाब देना चाहिए।

सभापति ने संसदीय कार्यमंत्री से क्या कहा? 

सभापति सीपी राधाकृष्णन का सदन संचालन का कौशल विपक्ष को भी अच्छा लगता है। उन्होंने खरगे को सुनने के बाद संसदीय कार्यमंत्री से कहा कि वह विपक्ष की भावनाओं को गृह मंत्री तक पहुंचाएं। हालांकि सभापति ने कहा कि इस बारे में गृह मंत्री को ही निर्णय लेना है कि वह सदन में बयान देंगे अथवा नहीं। सभापति सीपी राधाकृष्णन के इस दिशा निर्देश का संदेश काफी दूर तक जाने की दृष्टि से देखा जा रहा है। सभापति के इस निर्देश पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स पोस्ट करते हुए उम्मीद जताई कि संसदीय कार्यमंत्री सभापति के निर्देश का पालन करेंगे।  

सदन में क्यों हुई तीखी नोक-झोंक?

संसदीय कार्यमंत्री इसके बाद नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर आपत्ति जताई और नियम 335(2) और 240 का हवाला देते हुए कहा कि हर दिन खरगे जी वही बात पढ़ते हैं, वही बात कहते हैं। यह नियम हमारे विपक्ष के नेता पर लागू नहीं होता है। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के सदस्य सदन में आते हैं। दिन भर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देते। शोर-शराबा करते हैं। नारा लगाते हैं और संसद के कामकाज में रुकावट डालकर चले जाते हैं, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री जी मानसून सत्र के दौरान हर रोज संसद आते हैं।
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वह सुबह से लेकर देर शाम तक संसद भवन में रहते हैं। अपना काम करते हैं। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि आसन से सरकार को गृह मंत्री को सदन में बुलाने जैसा कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह विपक्ष नहीं तय करेगा कि कौन मंत्री सरकार की तरफ से बोलेगा या सदन में बयान देगा। यह सरकार का काम है कि वह किस मंत्री को क्या जिम्मेदारी सौंपेगी।

सदन के बाहर क्या बोले खरगे?

खरगे ने पत्रकारों से भी बात के दौरान कहा कि विपक्ष की मांग जायज है। वह गृहमंत्री और प्रधानमंत्री से सदन में आकर बयान देने की मांग कर रहे हैं। ये सरकार के नियंत्रण में हैं। सरकार इसे बहुत आसानी से कर सकती है। खरगे ने कहा कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को इतनी गंभीर घटना हुई है। फिर भी गृहमंत्री इस पर बयान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
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