जीएम सरसों के उगाए जाने की अनुमति को लेकर सरकार और उसके अपने संगठनों के बीच छीड़ी रार अब पीएम मोदी के दर पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह के जरिए जीएम सरसों के उत्पादन को जायज ठहराने के अगले ही दिन अपना सार्वजनिक विरोध प्रकट करते हुए संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है।
पीएम को लिखे पत्र में मंच ने कहा है कि जीएम सरसों पर सच को छूपाया गया है। पीएम मोदी से जीएम सरसों के उगाए जाने की अनुमति नहीं देने की मांग करते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि जीएम के सुरक्षा खतरों को लेकर भी सरकार को गुमराह किया गया है।
जीएम सरसों है जहरीला, कैंसर बढने की संभावना
जीएम सरसों के व्यवसायिक उत्पादन की मंजूरी पर नाराजगी जताते हुए स्वदेशी जागरण मंच ने सरकार से पूछा है कि वह इस मामले में जल्दबाजी में क्यों है। मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्वनी महाजन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि जीएम सरसों पर स्वदेशी बीज और देश में हुए शोध का फर्जी चोला पहनाया गया है।
उनका कहना है कि इस मामले में विदेशी कंपनी बेयर के व्यापार और शोध प्रयोग किए गए हैं। बेयर के बीच हुई आईपीआर की शर्तों को भी अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मंच का कहना है कि जीएम सरसों का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। हरबीसाईड होने की वजह से यह बेहद जहरीला भी है।