इस सवाल पर शिशिर अधिकारी साफ कहते हैं कि वह और उनके बेटे दिव्येंदु अधिकारी तृणमूल के सांसद हैं। आप दल-बदल विरोधी कानून देख लीजिए, उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है कि इसके दायरे में आएं। लेकिन उन्हें नहीं पता कि अभी वह किस दल में हैं और आगे क्या होगा? शिशिर अधिकारी कहते हैं कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। इसलिए उन्हें आने वाले समय की चिंता नहीं है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल और भाजपा में कड़ा मुकाबला हो रहा है। दो मई के बाद सबको पता चल जाएगा कि बंगाल में क्या हुआ?
तृणमूल या भाजपा में किसका प्रचार कर रहे हैं?
तृममूल कांग्रेस के सांसद ने इस सवाल का कोई सीधा उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का दौर चल रहा है। उनकी उम्र 80 साल की है। इसलिए घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। उनके पुत्र सांसद दिव्येन्दु भी नहीं। जबकि सुवेन्दु नंदीग्राम से अपने विधानसभा चुनाव प्रचार और भाजपा की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। सौम्येन्दु भी। शिशिर का कहना है कि वह और दिव्येन्दु किसी का प्रचार नहीं कर रहे हैं और न ही जनता से अभी किसी को वोट देने की अपील जारी किए हैं।
किसको वोट देंगे?
तृणमूल के सांसद हैं और बेटा भाजपा का उम्मीदवार। हल्दिया जिले में भी शिशिर अधिकारी परिवार की अच्छी राजनीतिक धमक है, लेकिन वोट देने के सवाल पर कहते हैं कि जिसको विवेक (मनोदशा) कहेगी। अभी कुछ तय नहीं है। मतदान का समय नजदीक आने पर जो विवेक कहेगा, उसकी ही सुनेंगे।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर जनता वोट देने का मन बना चुकी है। राज्य में प्रधानमंत्री मोदी के नाम चल रहा है और वहीं आएंगे। शिशिर अधिकारी कहते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अच्छी और लड़ाकू नेता हैं, लेकिन पिछले दस सालों में धीरे-धीरे तृणमूल की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। अधिकारी का कहना है कि नारदा, शारदा, कोयला घोटाले समेत हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार ने सरकार और ममता की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। हिंसा समेत तृणमूल के पराभव के तमाम कारण हैं।
शिशिर से किस मुंह से बात करे तृणमूल?
तृणमूल के नेता पार्थ चटर्जी कहते हैं कि शिशिर से किस मुंह से बात करें। पार्थ के मुताबिक उनके बेटे सुवेंदु और सौम्येंदु भाजपा में हैं। सुवेन्दु तृणमूल से बागी होकर नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे हैं। शिशिर पार्टी के सांसद और वरिष्ठ नेता हैं। उनके मन में और जुबान पर दो अलग-अलग चीजें चल रही हैं। उन्हें तय करने दीजिए कि यह क्या हैं?
तृणमूल के ही एक अन्य नेता का कहना है कि राजनीति में ही ढोंग के साथ सब चलता है। शिशिर अधिकारी के मन में अब भाजपा जगह बना चुकी है। इसलिए बहुत कुछ कहने-सुनने की गुंजाइश नहीं है। अब दो मई का ही सबको इंतजार है।