पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पुलिस अधिकारियों को चेतावनी देने वाले अभिषेक के बयान पर शुभेंदु ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अभिषेक पर तंज कसते हुए कहा कि उनके शरीर में सोडियम-पोटैशियम का संतुलन बिगड़ गया है, जिसकी वजह से वह असंगत बातें कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क जाने तक की सलाह दे दी। यह विवाद पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित झूठे मुकदमों को लेकर शुरू हुआ है।
अभिषेक बनर्जी पर शुभेंदु अधिकारी ने क्या टिप्पणी की?
शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के पास साल्टलेक स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया दी। वह यहां जनता की शिकायतें सुनने के लिए आयोजित ‘जनता दरबार’ से पहले पहुंचे थे। शुभेंदु ने कहा कि अभिषेक को सोडियम-पोटैशियम के असंतुलन की समस्या हो सकती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अभिषेक इलाज के लिए न्यूयॉर्क जा सकते हैं और इसके लिए उन्हें जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी दे दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अभिषेक के एक सहयोगी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और उसने उनके खिलाफ कई बातें बताई हैं। शुभेंदु के मुताबिक, अभिषेक को इसकी जानकारी मिली होगी और इसी वजह से वह अपना संतुलन खो बैठे हैं। हालांकि, यह टिप्पणी शुभेंदु का राजनीतिक तंज था, किसी चिकित्सकीय जांच का निष्कर्ष नहीं।
अभिषेक बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों को क्या चेतावनी दी थी?
यह विवाद गुरुवार को अभिषेक बनर्जी के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए टीएमसी कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसा रहे हैं। अभिषेक ने कहा था कि वह ऐसे अधिकारियों के नाम याद रखेंगे, जो शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में सरकार बदलती है, तो मुख्यमंत्री के करीबी बनकर अच्छी पोस्टिंग हासिल करने की कोशिश करने वाले अधिकारियों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अभिषेक का यह बयान सीधे तौर पर पुलिस की भूमिका और राजनीतिक दबाव के आरोपों से जुड़ा था।
अभिषेक ने सरकार बदलने पर अधिकारियों को लेकर क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने अपने बयान में कहा था कि जो पुलिस अधिकारी टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित तौर पर झूठे मामले दर्ज कर रहे हैं, उनके नाम याद रखे जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी राजनीतिक नेतृत्व को खुश करने के लिए काम कर रहे हैं। अभिषेक ने कहा कि सरकार बदलने के बाद ऐसे अधिकारियों को अपने फैसलों का जवाब देना पड़ सकता है। उनके इस बयान को पुलिस अधिकारियों के लिए राजनीतिक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जवाब में शुभेंदु ने अभिषेक की भाषा और बयान देने के तरीके पर हमला किया।
19 लोगों की मौत के मामले में अभिषेक ने क्या मांग की थी?
अभिषेक बनर्जी ने चोरबागान दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों की गिरफ्तारी की भी मांग की थी। उन्होंने यह मांग भगदड़ में 19 लोगों की मौत के मामले को लेकर की। अभिषेक ने मुख्यमंत्री से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के बजाय ‘राजधर्म’ निभाने की अपील की थी। उनका कहना था कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। इसी बयान के बाद शुभेंदु ने उन पर निशाना साधा।
विवाद में गिरफ्तार सहयोगी और स्टिंग मामले का क्या संदर्भ है?
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी के एक सहयोगी की गिरफ्तारी के बाद उसने उनके खिलाफ जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में उस सहयोगी का नाम या कथित खुलासे का पूरा विवरण नहीं बताया। मुख्यमंत्री ने इसी दावे को अभिषेक के बयान से जोड़ते हुए कहा कि उन्हें शायद गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी मिल गई है। फिलहाल इस पूरे विवाद में एक ओर अभिषेक पुलिस अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर शुभेंदु उनके बयान पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच यह टकराव राज्य की राजनीति में पुलिस की भूमिका और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बढ़ती खींचतान को सामने लाता है।