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West Bengal: ममता की चाय पीकर सुवेंदु ने दिखाए तेवर, बोले- बंगाल में सीएए लागू होकर रहेगा

Sun, 27 Nov 2022 01:37 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, कोलकाता

सार

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके अपना एक वादा पूरा किया है। इसी तरह, भाजपा सीएए को लागू करने के अपने वादे को पूरा करेगी।
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ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी लेकिन उसके अगले ही दिन भाजपा नेता सुवेंदु ने सीएम ममता को चुनौती दी कि दम है तो बंगाल में सीएए को रोककर दिखाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि जैसे उन्होंने ममता को नंदीग्राम में हराया था, वैसे ही आगे भी हराएंगे। 

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उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में एक जनसभा के दौरान कहा कि मतुआ समुदाय के सदस्यों को भी नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने सीएए के बारे में कई बार बात की है। नागरिकता संशोधन अधिनियम को राज्य में लागू किया जाएगा। आगे अधिकारी ने कहा कि सीएए अधिनियम यह सुझाव नहीं देता है कि किसी की नागरिकता छीन ली जाएगी।

बता दें कि सीएए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता देने की सुविधा प्रदान करता है। चूंकि अधिनियम के तहत नियम अभी तक सरकार द्वारा नहीं बनाए गए हैं, इसलिए अब तक किसी को भी इसके तहत नागरिकता नहीं दी जा सकती है। 
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भाजपा सीएए को लागू करने के अपने वादे को पूरा करेगी
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके अपना एक वादा पूरा किया है। इसी तरह, भाजपा सीएए को लागू करने के अपने वादे को पूरा करेगी। आगे कहा कि केंद्र सरकार किसी का अधिकार छीनने में विश्वास नहीं करती है। हमारे प्रधानमंत्री विभाजनकारी राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं। 

पांच लोकसभा सीटों पर मतुआ समुदाय का प्रभाव
जनसभा मतुआ समुदाय ने आयोजित की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। बंगाल में मतुआ समाज की अनुसूचित जाति में एक बड़ी हिस्सेदारी है। पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण इस समुदाय के लोग 1950 के दशक में पश्चिम बंगाल की ओर पलायन कर यहीं रहने लगे। वहीं अब इनकी आबादी करीब 30 लाख है और कम से कम पांच लोकसभा सीटों और नदिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की लगभग 50 विधानसभा सीटों पर इस समुदाय का प्रभाव है। 

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