कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक बांग्लादेशी महिला द्वारा भारत में रहने की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। महिला का भारतीय पति फरार है और आश्रित वीजा (एक्स-1 वीजा) के लिए उसकी सहमति के बिना इसे बढ़ाया नहीं जा सकता है।
बांग्लादेशी महिला ने वीजा की अवधि बढ़ाने की मांग की और उसे छह महीने के लिए वीजा दे दिया गया, क्योंकि उसकी शादी एक भारतीय से हुई थी। बाद में वीजा को फिर से 21 जून, 2023 तक बढ़ा दिया गया। जब एक और विस्तार मांगा गया, तो अधिकारियों ने मांग की कि वह प्रायोजक/माता-पिता/पति/पत्नी के रूप में एक वचन/सहमति प्रस्तुत करे क्योंकि वह आश्रित वीजा पर थी।
इस संबंध में महिला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि उसका पति फरार है और इसलिए वह सहमति दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकती हैं। हालांकि, एचसी ने कहा कि वह मामले के तथ्यों को देखते हुए अधिकारियों को वीजा बढ़ाने का निर्देश नहीं दे सकता है।
पांच को सुनाया था ये फैसला
याचिका को खारिज करते हुए, HC ने 5 जनवरी के अपने फैसले में कहा, “बिना किसी दस्तावेज के देश में अधिक समय तक रहने वाले अन्य देशों के नागरिकों को निष्कासित करने की भारत सरकार की शक्ति पूर्ण और निरंकुश है। याचिकाकर्ता के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति दिखाने पर सरकार, एफआरआरओ और आप्रवासन ब्यूरो के विवेक पर बाधा उत्पन्न होगी, खासकर उन मामलों में जहां किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने का थोड़ा सा भी खतरा हो।'