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कर्नाटक उच्च न्यायालय: बांग्लादेशी महिला का पति बराकर, भारत में रहने की अवधि की मांग को खारिज कर दिया गया

Sat, 20 Jan 2024 04:46 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं क्योंकि वह बांग्लादेश में एसएसजी नामक संगठन के साथ लगातार संपर्क में थी, जिसका उस देश की सेना के साथ संबंध था। 2003 से 2005 के बीच महिला ने ढाका में थाईलैंड दूतावास कार्यालय में काम किया था। 
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कर्नाटक हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक बांग्लादेशी महिला द्वारा भारत में रहने की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। महिला का भारतीय पति फरार है और आश्रित वीजा (एक्स-1 वीजा) के लिए उसकी सहमति के बिना इसे बढ़ाया नहीं जा सकता है।

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हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं क्योंकि वह बांग्लादेश में एसएसजी नामक संगठन के साथ लगातार संपर्क में थी, जिसका उस देश की सेना के साथ संबंध था। 2003 से 2005 के बीच महिला ने ढाका में थाईलैंड दूतावास कार्यालय में काम किया था। उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका 46 वर्षीय रक्तिमा खानम द्वारा दायर की गई थी, जिस पर न्यायमूर्ति एम नागाप्रसन्ना ने सुनवाई की। महिला ने दावा किया कि उसे बेंगलुरु के रहने वाले और भारतीय नागरिक जनार्दन रेड्डी से प्यार हो गया।

दोनों ने दिसंबर 2017 में शादी कर ली और महिला ने दावा किया कि रेड्डी ने इस्लाम धर्म अपना लिया है। उन्होंने बताया कि दंपति चेन्नई में रहते थे लेकिन जल्द ही उनके प्रेम संबंध टूट गये और महिला बांग्लादेश वापस चली गई, क्योंकि जिस पर्यटक वीजा पर वह रह रही थी वह समाप्त हो गया था। जब महिला ने दोबारा वीजा के लिए आवेदन किया, तो इसे प्रवेश वीजा  एक आश्रित वीजा में बदल दिया गया, जो फरवरी 2020 तक वैध था।

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अधिकारियों ने महिला से की वचन प्रस्तुत करने की मांग

बांग्लादेशी महिला ने वीजा की अवधि बढ़ाने की मांग की और उसे छह महीने के लिए वीजा दे दिया गया, क्योंकि उसकी शादी एक भारतीय से हुई थी। बाद में वीजा को फिर से 21 जून, 2023 तक बढ़ा दिया गया। जब एक और विस्तार मांगा गया, तो अधिकारियों ने मांग की कि वह प्रायोजक/माता-पिता/पति/पत्नी के रूप में एक वचन/सहमति प्रस्तुत करे क्योंकि वह आश्रित वीजा पर थी। 

इस संबंध में  महिला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनके वकील ने तर्क दिया कि उसका पति फरार है और इसलिए वह सहमति दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकती हैं। हालांकि, एचसी ने कहा कि वह मामले के तथ्यों को देखते हुए अधिकारियों को वीजा बढ़ाने का निर्देश नहीं दे सकता है।

पांच को सुनाया था ये फैसला
याचिका को खारिज करते हुए, HC ने 5 जनवरी के अपने फैसले में कहा, “बिना किसी दस्तावेज के देश में अधिक समय तक रहने वाले अन्य देशों के नागरिकों को निष्कासित करने की भारत सरकार की शक्ति पूर्ण और निरंकुश है। याचिकाकर्ता के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति दिखाने पर सरकार, एफआरआरओ और आप्रवासन ब्यूरो के विवेक पर बाधा उत्पन्न होगी, खासकर उन मामलों में जहां किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने का थोड़ा सा भी खतरा हो।'

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