मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन को लिखे पत्र में निलंबित आईएएस एन प्रशांत ने कहा कि वह जनवरी 2022 में सचिव पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हो गए थे, लेकिन इसमें लगातार देरी की जा रही है। पिछले तीन साल में उनसे तीन बैच जूनियर अधिकारियों की पदोन्नति की गई है। लेकिन उनके प्रमोशन को जानबूझकर रोका जा रहा है।
केरल के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए जयतिलक के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में निलंबित किए गए आईएएस एन प्रशांत ने पदोन्नति में देरी का मुद्दा उठाया है। मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन को लिखे पत्र में निलंबित आईएएस एन प्रशांत ने कहा कि वह जनवरी 2022 में सचिव पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हो गए थे, लेकिन इसमें लगातार देरी की जा रही है।
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18 फरवरी को लिखे पत्र में एन प्रशांत ने लिखा कि पिछले तीन साल में उनसे तीन बैच जूनियर अधिकारियों की पदोन्नति की गई है। लेकिन उनके प्रमोशन को जानबूझकर रोका जा रहा है। पदोन्नति न किए जाने का कारण मेरे खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई को बताया जा रहा है। जबकि यह कार्रवाई मेरी पदोन्नति के लिए तय तिथि के काफी समय बाद शुरू की गई थी। पदोन्नति को रोकने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई को बेवजह आधार बनाया जा रहा है।
मुख्य सचिव पर अनुशासात्मक कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाते हुए एन प्रशांत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष रूप से जांच नहीं की जा रही है। एन प्रशांत ने कहा कि जनवरी 2022 में बिना किसी कारण से मेरी पदोन्नति रोक दी गई है। जबकि मेरे खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई 16 नवंबर 2022 से शुरू की गई थी। इससे लगता है मेरी पदोन्नति को रोकने के लिए इसे आधार बनाया गया। अब 2025 में भी मेरी फाइल बिना किसी निर्णय के रुकी हुई है। मैंने जब फाइल की एक प्रति मांगी तो उस अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया गया। मेरे बारे में प्रशासनिक फाइल में क्या छिपाया जा रहा है?
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निलंबित आईएएस ने लिखा कि कहा जाता है कि हर फाइल एक जीवन है। लेकिन मेरी फाइल सालों से बेजान पड़ी है। मुझ पर पेशेवर कर्तव्यों या काम में कमी को लेकर कोई आरोप नहीं लगा। मेरे खिलाफ जो कार्रवाई की जा रही है, वह मेरे आधिकारिक कर्तव्यों से बिल्कुल अलग है। कानून में कहा गया कि अनुशासनात्मक कार्यवाही वैध विचारों पर होनी चाहिए। न कि व्यक्तिगत शिकायतों पर। नियम यह भी है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई छह महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। लेकिन मेरे खिलाफ चल रही कार्रवाई अब तक सुलझ नहीं सकी है।
इसलिए किया गया था निलंबन
कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग में विशेष सचिव प्रशांत ने पिछले साल फेसबुक पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ए जयतिलक पर आरोप लगाया था कि जयतिलक एक विशेष रिपोर्टर बन गए हैं और मीडिया के माध्यम से निराधार आरोप फैलाकर उन्हें कमजोर करने का काम कर रहे हैं। इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आईएएस प्रशांत जब अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण विभाग के सीईओ थे तो दोनों जातियों के कल्याण के लिए समर्पित पहल उन्नति की कई महत्वपूर्ण फाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। रिपोर्ट में कहा गया कि आईएएस जयतिलक ने इस मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को एक रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों का खंडन करने के लिए फेसबुक पर पोस्ट किया था।