पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं। भारतीय राजनीति का सौम्य चेहरा बनीं स्वराज ओजस्वी वक्ता, प्रभावी सांसद होने के साथ ही कुशल प्रशासक भी थीं।
11 बार चुनाव लड़ा
सुषमा स्वराज ने बीते चार दशक में 11 बार चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वह सात बार सांसद रह चुकी हैं। स्वराज के पिता हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख सदस्य थे। स्वराज अपने छात्र जीवन में एबीवीपी से भी जुड़ी थीं।
पति भी रहे सांसद
सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस के बेहद करीबी माने जाते थे। यही कारण था कि वह साल 1975 में फर्नांडिस की टीम का हिस्सा बन गईं। स्वराज के पति स्वराज कौशल छह साल तक राज्यसभा के सांसद रहे थे। इसके साथ ही वह मिजोरम के राज्यपाल भी थे।
जॉर्ज फर्नांडिस के लिए प्रचार
भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय सुषमा और प्रमोद महाजन सबसे लोकप्रिय वक्ता थे। स्वराज की गिनती भाजपा के दिल्ली फोर में हुआ करती थी। आपातकाल के समय में बड़ौदा डायनामाइट मामले में जॉर्ज फर्नांडिस गिरफ्तार हो गए थे। तब उन्होंने जेल में रहकर ही मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ने का फैसला लिया था।
तब वो सुषमा स्वराज ही थीं, जिन्होंने फर्नांडिस की हथकड़ियों में जकड़ी तस्वीर को दिखाकर पूरे क्षेत्र में प्रचार किया था। चुनाव परिणाम के वक्त फर्नांडिस दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद थे।
पहली पूर्ण कालिक विदेश मंत्री
सुषमा स्वराज की बहुत बड़ी उपलब्धि ये भी थी कि वह पहली पूर्ण कालिक विदेश मंत्री थीं। उनसे पहले इदिरा गांधी ने ये पद संभाला था। भारतीय राजनीति की तेज-तर्रार वक्ता मानी जाने वाली सुषमा अपने ओजस्वी भाषणों में जितनी आक्रामक दिखती थीं, वह अपने निजी जीवन में उतनी ही सरल और सौम्य थीं।
जब कठोर व्रत रखने की बात कही
जब साल 2004 में चुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला लिया तो स्वराज ने कठोर व्रत रखने की बात कही थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हुए कहा था कि अगर सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह तुरंत अपना सांसद का पद छोड़ देंगी और एक भिक्षुणी की तरह जीवन बिताएंगी।
स्वराज ने कहा था कि वह रंगीन वस्त्र के बजाय सफेद वस्त्र धारण करेंगी, जमीन पर सोएंगी और भुने हुए चने खाएंगी। हालांकि बाद में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया। सोनिया गांधी और सुषमा स्वराज ने साल 1999 में कर्नाटक की बेल्लारी लोकसभा सीट से एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
इस चुनावी लड़ाकी को आदर्श नारी और विदेशी महिला के बीच की कथित लड़ाई बताया गया, जिसमें स्वराज को हार मिली और सोनिया संसद पहुंच गईं। इसके बाद साल 2004 में एनडीए को पछाड़ यूपीए ने सरकार बनाई थी।