स्मारक पर स्वराज याकोव शापीरो से भी मिलीं जिन्होंने शास्त्री की आवक्ष कांस्य प्रतिमा बनायी है। ताशकंद में जनवरी, 1966 में ताशकंद समझौता पर दस्तखत के बाद शास्त्री की मृत्यु हो गयी थी। इस समझौते के साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का औपचारिक अंत हुआ था। शास्त्री की याद में यहां यह स्मारक भी बनाया गया है।
कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (श्रद्धांजलि कार्यक्रम से पहले) उज्बेकिस्तान की लेजिस्टिव एसेम्बली के स्पीकर नूरदिनजोन इस्मोइलोव तथा संसद में विभिन्न गुटों के प्रतिनिधियों से मिलीं । दोनों पक्षों ने दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध बढ़ाने में संसद की भूमिका पर चर्चा की।’’
प्रवक्ता ने टि्वटर पर लिखा, ‘‘उज्बेकिस्तान में भारतीय आमों का प्रचार किया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ताशकंद में आम निर्यातकों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित आम महोत्सव का उद्घाटन किया। निर्यातक फल बाजार जायेंगे और फल कारोबारियों से मिलेंगे।’’
कुमार के अनुसार स्वराज ने ताशकंद में उज्बेक विद्वानों, हिंदी शिक्षकों, विद्यार्थियों, आईटीईसी और आईसीसीआर के पूर्व विद्यार्थियों से भेंट की। ये सभी अकादमिक आदान प्रदान एवं दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध में अहम भूमिका निभाते हैं। विदेश मंत्री ने उज्बेकिस्तान में सर्वत्र भारतीय संस्कृति की उपस्थिति की प्रशंसा की।
वह कल उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला एरीपोव से मिलीं और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। भारत और उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदार हैं और उनके बीच मजबूत ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं। स्वराज तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में यहां पहुंची थीं। इससे पहले वह किर्गिस्तान और कजाखस्तान गयी थीं।