कमलनाथ के पद छोडने और शीला दक्षित के खिलाफ टैंकर घोटाले में एफआईआर होने के बाद अब पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी का जिम्मा पार्टी की तरफ से सौंपा जा सकता है।
कांग्रेस के सामने दिक्कत यह है कि पंजाब में वह किसी सीनियर नेता को ही प्रभारी बनाकर सीएम पद के उम्मीदवार अरमिंदर सिंह से राजनीतिक सामांजस्य बैठा सकते हैं। इसीलिए पहले वरिष्ठ नेता कमलनाथ को जिम्मा सौंपा था।
कमलनाथ के पद छोडने के बाद शीला दीक्षित के नाम पर विचार हुआ। शीला के खिलाफ टैंकर घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पैदा हुई विपरीत परिस्थितियों में सुशील कुमार शिंदे के नाम पर अब गंभीर विचार चल रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी की तरफ से शिंदे के नाम पर हां है।
कांग्रेसी शिंदे के पक्ष में एक और तर्क दे रहे हैं कि पंजाब में दलित वोटों की तादाद तीस फीसदी है। पार्टी रणनीतिकार सोनिया गांधी को यह समझाने में फिलहाल कामयाब हो गए हैं कि दलित वोट शिंदे के नाम पर पार्टी के हक में जा सकते हैं।
सरकार बनाने में इसका लाभ मिलेगा। पार्टी हाईकमान को रणनीतिकार यह भी बता रहे है कि शिंदे विवादों से भी दूर हैं। उनके पास राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति का लंबा अनुभव है। माना जा रहा है कि पार्टी की तरफ से पूर्व गृह मंत्री के नाम का एलान कभी भी हो सकता है।