सर्वे के निष्कर्ष से यह तथ्य सामने आया कि भारत में हर दो में से एक व्यक्ति वृद्धावस्था में अपनी बचत से अपने स्वास्थ्य संबंधी खर्च पूरे करता है और उसके बाद बीमे का नंबर आता है। भारत में हर दस में से चार लोग अपने लिए स्वास्थ्य बीमा लेते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहे लोग इस मामले में बेहतर तैयारी करते हैं और नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ ही बीमा भी कराते हैं।
लोगों के तनावग्रस्त होने के कारणों में मोटापा और बीमारी भी शामिल है और इस क्रम में नींद संबंधी परिवर्तनों का स्थान सबसे नीचे रहा।
सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत तादाद ऐसे लोगों की थी, जो सामाजिक व्यस्तता में कमी और परिवार और दोस्तों के साथ पर्याप्त समय न गुजार पाने और अपने शौक पूरे न कर पाने के कारण तनाव का शिकार हो जाते हैं। माता पिता की देखभाल और बच्चों को उनके पैरों पर खड़ा करने की जद्दोजहद भी बहुत लोगों को तनाव के दरवाजे पर पहुंचा देती है।
वैसे आज इनसान की हालत मशीन जैसी हो गई है। हर दिन अपनी हसरतों के पीछे भागता है और हर रात अपनी कोशिशों के नाकाम होने का मलाल करता है। ऐसे में अगर उसे तनाव हो जाए तो उसके लिए जिम्मेदार भी वह खुद ही है क्योंकि, 'इन उम्र से लंबी सड़कों को, मंजिल पे पहुंचते देखा नहीं, यूं भागती दौड़ती फिरती हैं, हमने तो ठहरते देखा नहीं।'