अमेरिका, यूरोप और चीन समेत दुनिया के अन्य सभी देशों के मुकाबले अगले साल यानी 2023 में भारत में सबसे ज्यादा वेतन बढ़ सकता है। भारतीय कंपनियां दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले वेतन में सबसे अधिक वास्तविक वृद्धि कर सकती हैं। वेतन वृद्धि की दर अगर महंगाई से अधिक है तो उसे वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कहा जाता है।
ईसीए इंटनेशनल के सर्वे में दावा किया गया है, दुनिया के सिर्फ 37% देशों में ही 2023 में महंगाई को मात देने वाली वेतन वृद्धि की उम्मीद है। सर्वे 68 देशों व शहरों में मौजूद 360 बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुटाई जानकारी पर आधारित है।
सर्वाधिक वृद्धि करने वाले शीर्ष-10 देश
| देश |
बढ़ोतरी |
| भारत |
4.6% |
| वियतनाम |
4.0% |
| चीन |
3.8% |
| ब्राजील |
3.4% |
| सऊदी अरब |
2.3% |
| मलयेशिया |
2.2% |
| थाइलैंड |
2.2% |
| ओमान |
2.0% |
| रूस |
1.9 |
| ताइवान |
1.8% |
अमेरिका और यूरोप में नकारात्मक वृद्धि
वास्तविक वेतन वृद्धि में यूरोपीय देशों के कर्मचारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसकी वजह महंगाई का कई दशक के उच्च स्तर पर पहुंचना है। महंगाई के मुकाबले यूरोपीय देशों में औसत वास्तविक वेतन वृद्धि (-)1.5% हो सकती है।
- अमेरिका में औसत वास्तविक वेतन (-)0.5 फीसदी बढ़ सकता है।
- अफ्रीका और मध्य एशियाई देशों में यह बढ़ोतरी (-)0.1 फीसदी और सिंगापुर में एक फीसदी हो सकती है।
- एशिया प्रशांत क्षेत्र में वेतन अगले साल 1.3 फीसदी बढ़ सकता है।
पाकिस्तान और श्रीलंका में हालात बिलकुल उलट
पाकिस्तान और श्रीलंका में हालात बिल्कुल उलटे दिख रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान में कर्मचारियों का वेतन अगले साल 9.9 फीसदी घट सकता है। श्रीलंका में वेतन 20.5 फीसदी और तुर्किये में 14.4 फीसदी कट सकता है।