केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के कैंप पर सितंबर में हुए आतंकी हमले के तुरंत बाद ही सर्जिकल स्ट्राइक करने का निर्णय ले लिया था। यह खुलासा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मणिपुर में रविवार को किया। राजनाथ ने यहां कहा कि एलओसी के पार सर्जिकल स्ट्राइक करने का निर्णय पिछले साल सितंबर में उड़ी में सेना कैंप पर हमले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आपातकालीन बैठक में लिया गया।
उन्होंने कहा, ‘सितंबर में (पिछले साल) जब सेना के कैंप पर आतंकी हमला और 17 जवानों के मौत की खबर आई, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और मैंने अधिकारियों के साथ मिलकर आपातकालीन बैठक की। इस बैठक में सर्जिकल स्ट्राइक करने का मजबूत निर्णय लिया गया।’ उड़ी हमले के 11 दिन बाद 28 और 29 सितंबर की मध्यरात्रि में एलओसी पार आतंकियों के सात लॉन्च पैडों को तबाह किया गया।
राजनाथ ने कहा, ‘सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये हमने दुनिया को यह संदेश दिया कि हम कमजोर नहीं मजबूत राष्ट्र हैं।’ उन्होंने कहा कि मुसलमानों समेत पाकिस्तान का आम आदमी भारत के साथ अच्छे संबंधों का पक्षधर है। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग हैं जो आतंकवाद और घृणा का रास्ता चुनना चाहते हैं।