उरी में चार आतंकियों ने सेना के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हमला किया था। इस हमले में 19 जवान शहीद और 30 जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकी मारे गए थे। इसके मात्र 10 दिन में भारत ने भी पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
भारतीय सेना ने आज से छह साल पहले पीओके में घुसकर पाकिस्तान परस्त 50 आतंकियों का सफाया कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह जम्मू कश्मीर के उरी में सेना के शिविर पर किए गए हमले में शहीद 19 जवानों की मौत का बदला था। यह ऐसा बदला था, जिससे आज तक दुश्मनों के दांत खट्टे हैं। बुधवार को देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किए गए सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान की भी सर्जिकल स्ट्राइक की व्यूह रचना में अहम भूमिका थी।
दरअसल, 18 सितंबर 2016 को उरी में आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 19 जवान शहीद हो गए थे। इसे लेकर पूरे देश में आतंकियों व उसके आका पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त रोष था। भारत सरकार भी हैरान होने के साथ ही बदले की आग में झुलस रही थी। आखिरकार सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पीओके में घुसकर आतंकियों का घर में सफाया कर डाला। इन दहशतगर्दों को ऐसा सबक सिखाया कि उनके डेरे कब्रगाह में बदल गए।
सर्जिकल स्ट्राइक को 28-29 सितंबर 2016 की रात पीएम नरेंद्र मोदी, तत्कालीन रक्षामंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर, तत्कालीन सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग, तत्कालीन डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और उत्तरी कमान के तत्कालीन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा और एनएसए अजीत डोभाल की सुगठित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया था।