केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने यहां बृहस्पतिवार को दो दिवसीय ग्लोबल लॉजिस्टिक समिट में कहा कि अगले कुछ वर्षों में देश में 56 नए हवाईअड्डे काम करना शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि व्यापार का दोहन करने तथा घरेलू व वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों का अधिक से अधिक तथा तेजी से एकीकरण करने को लेकर भारत जैसे देश के लिए दक्ष लॉजिस्टिक तंत्र बेहद महत्वपूर्ण है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अगले कुछ वर्षों में 56 नए हवाईअड्डे काम करना शुरू कर देंगे।
मंत्री ने कहा कि सभी हितधारकों के एक साथ आने से लॉजिस्टिक व कनेक्टिविटी के सुधार के लिए सही मंच का निर्माण होगा, जो देश के भीतर तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रवाह के लिए जरूरी है। सालाना 10 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ रहे भारतीय लॉजिस्टिक उद्योग के 2019-20 तक लगभग 215 अरब डॉलर का हो जाने की संभावना है। बीते एक दशक के दौरान रेलवे, रोड, हाइवे, इनलैंड वाटरवेज, एविएशन, पोर्ट्स तथा कोस्टल शिपिंग मे उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (विश्व बैंक द्वारा तैयार) में भारत की रैंकिंग 2014 के 54 से सुधरकर 2016 में 35 हो गई।
लॉजिस्टिक सेवाओं की मांग में वृद्धि को बरकरार रखने के लिए लॉजिस्टिक के प्रति एक सुसंगत दृष्टिकोण विकसित करना महत्वपूर्ण है। इन मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने तथा बेहतर समझ विकसित करने के लिए वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने फिक्की तथा विश्व बैंक समूह के सहयोग से पांच एवं छह अप्रैल, 2018 को समिट का आयोजन कर रहा है।