कोरोना का यह दौर इतना भयंकर है कि हर दिन चौकाने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। अबतक अस्पतालों के बाहर मरीजों की भर्ती के लिए, मरीज के शव को लेने के लिए, शमशान या कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार के लिए या फिर रेमडेसिविर और दूसरी दवाओं के लिए लंबी लाइनें देखी जा रही थीं लेकिन अब शवों के डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी लंबी लंबी लाइनें लग रही हैं।
ये हाल गुजरात के सूरत शहर का है। यहां सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन कोरोना वायरस से केवल 25 से 28 मरीजों की मौत हो रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। शहर के अठवा जोन में डेथ सर्टिफिकेट के लिए रोज सुबह साढ़े नौ बजे से लाइन लगनी शुरू होती है।
डेथ सर्टिफिकेट बनाने वाले विभाग में काम कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि मंगलवार को 300-400 फॉर्म बांटे गए। उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से यही हाल है। बता दें कि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के अंदर करा जाए तो मुफ्त में होता है। उसके बाद 21 से 30 दिन में दो रुपये और एक महीने से एक साल लेट कराने में पांच रुपये लेट फीस लगती है।
वहीं गुजरात में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। सूरत जिले मे मंगलवार को कोरोना के 2,269 मामले मिले। इनमें शहर के 1,858 और गांव के इलाकों के 411 मरीज हैं। वहीं सूरत जिले में बीते 24 घंटे में 27 लोगों की मौत हुई है जबकि 1700 के करीब लोग इस वायरस से ठीक भी हुए हैं।
सूरत जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या की बात करें तो ये आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है। यहां 1,08, 774 मरीज कोरोना पॉजिटिव हैं। वहीं जिले के 1,698 लोग अबतक इस महामारी के आगे अपना दम तोड़ चुके हैं। वहीं सूरत जिले में 22 हजार से ज्यादा सक्रिय मामले हैं।