राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने देश के बड़े धार्मिक स्थलों में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला है। सुले ने अयोध्या, उज्जैन और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर जैसे पवित्र स्थानों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को बेहद शर्मनाक बताया और पूछा कि इन मामलों की पहले गहन जांच क्यों नहीं की गई?
यह विवाद तब और गरमा गया जब एक दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर में कथित 'लूट' का मुद्दा उठाया था। सुप्रिया सुले ने इसी का जवाब देते हुए सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
भगवान के घर में हेराफेरी सबसे गंदी राजनीति: सुले
सुप्रिया सुले ने कहा कि भगवान राम और अन्य प्रमुख धार्मिक केंद्रों से जुड़े स्थानों पर किसी भी तरह का भ्रष्टाचार पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, 'अगर मंदिरों में भ्रष्टाचार हो रहा है, तो इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। अगर ये आरोप सच हैं, तो मैं कहूंगी कि यह सबसे गंदी चीज है। आखिर अयोध्या, उज्जैन और मुंबई के सिद्धिविनायक जैसे धार्मिक स्थलों पर अनियमितताओं के आरोपों की पहले गहन जांच क्यों नहीं की गई?'
गौरतलब है कि राम मंदिर में दान के पैसे में हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कैश और कीमती सामान की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुले ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भ्रष्टाचार के आरोपों पर केवल विपक्षी नेताओं को चुनिंदा रूप से निशाना बनाती है और बाद में उनमें से कई को अपनी पार्टी में शामिल कर लेती है। उन्होंने तंज कसा कि भाजपा के पास अब भ्रष्टाचार पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है।
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क्या अंधविश्वास महिलाओं को निशाना बना रहा है?
सुप्रिया सुले ने समाज में फैल रहे अंधविश्वास पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का इतिहास सामाजिक सुधारों और प्रगतिशील मूल्यों से जुड़ा है, इसलिए यहां अंधविश्वास के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
बारामती की सांसद ने अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि राज्य में अंधविश्वास विरोधी कानून को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के ढोंगी बाबाओं के जाल में फंसने पर दुख जताया और कहा कि आज के तकनीकी युग में समाज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। इस बीच सुप्रिया सुले ने संसद में एक निजी विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल) लाने की घोषणा की, जिसके तहत निर्वाचित प्रतिनिधि बिना इस्तीफा दिए 5 साल के कार्यकाल में पार्टी नहीं बदल सकेंगे।
क्या दलबदलू नेताओं पर कसेगा कानूनी शिकंजा?
राजनीति में नेताओं की खरीद-फरोख्त को लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक बताते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि वह जल्द ही संसद में एक सख्त कानून बनाने की मांग करेंगी। उनके प्रस्तावित बिल के अनुसार, यदि कोई नेता चुनकर आता है, तो वह बीच कार्यकाल में बिना दोबारा चुनाव लड़े दल नहीं बदल पाएगा। इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कमियों को लेकर भी अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है।