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CAPF: 150 कैडर अफसरों ने देश की रक्षा में दिया अपना सर्वोच्च बलिदान, CRPF के 60 तो BSF के 85 अधिकारी शामिल

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BSF - फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 150 कैडर अफसरों ने आतंक/नक्सल/उग्रवाद के मोर्चे और बॉर्डर पर दुश्मन को सबक सिखाते वक्त शहादत दी है। इनमें बीएसएफ के 85 अधिकारी शामिल हैं। वहीं सीआरपीएफ के 60 कैडर अफसरों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। एसएसबी के पांच अधिकारी, राष्ट्र की रक्षा में शहीद हुए हैं। अगर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर अधिकारियों की शहादत का आंकड़ा देखें तो उसमें 'सहायक कमांडेंट' की संख्या सबसे ज्यादा है। दूसरा नंबर डिप्टी कमांडेंट का है। 

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15 साल में पहली पदोन्नति नहीं मिली 
बता दें कि मौजूदा समय में केंद्रीय बलों में जो कैडर अधिकारी पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़े हैं, उनमें सहायक कमांडेंट, सबसे अधिक हैं। सहायक कमांडेंट को पहली पदोन्नति लेने में 15-16 साल लग रहे हैं। जब इन्हें पहली पदोन्नति में इतना वक्त लग रहा है तो उसके बाद के पदोन्नति क्रम का अंदाजा लगाया जा सकता है। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं कि सहायक कमांडेंट को जब 15 साल में पहली पदोन्नति मिलेगी तो वे कमांडेंट पद से आगे ही नहीं बढ़ेंगे। उनके डीआईजी, आईजी और एडीजी बनने का तो सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में बल के ये अनुभवी अफसर, अहम पदों पर नेतृत्व की भूमिका में रहेंगे, ये तो संभव ही नहीं हो सकेगा। 

सीआरपीएफ के डीसी भवानी सिंह ने दी शहादत 
सीआरपीएफ की 10वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट ठाकुर भवानी सिंह ने 1964 में श्रीनगर में आरओपी ड्यूटी के दौरान शहादत दी थी। इसके बाद 8वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट आरएस बलोट, अगस्त 1969 में मणिपुर के एंटी इन्सर्जेंसी ऑपरेशन में शहीद हुए थे। 45वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट सूदन सिंह ने पश्चिम बंगाल में अक्तूबर 1970 के दौरान एंटी नक्सल ऑपरेशन में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। अभी तक सीआरपीएफ में विभिन्न ऑपरेशनों में 35 सहायक कमांडेंट, 17 डिप्टी कमांडेंट, 7 टूआईसी और एक कमांडेंट, शहीद हो चुके हैं। 
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बीएसएफ के डीसी ने 1971 में दी शहादत 
बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट सतीश कुमार ने नवंबर 1971 में दुश्मन फायर में शहादत दी थी। 11 दिसंबर 1971 में सहायक कमांडेंट आरके वधवा ने भारत और पाकिस्तान की लड़ाई में सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके बाद 13 दिसंबर 1971 में डीसी/पायलट विवेक चौधरी ड्यूटी के दौरान प्लेन क्रैश में शहीद हुए थे। 17 दिसंबर 1971 को डिप्टी कमांडेंट भानवान सिंह राठौर ने मिलिटेंट एक्शन में शहादत की थी। बीएसएफ में 39 सहायक कमांडेंट, 26 डिप्टी कमांडेंट, सात टूआईसी, आठ कमांडेंट, दो डीआईजी, एक एडीआईजी, एक-एक एमओ और एसएमओ ने शहादत दी है। एसएसबी में 14वीं बटालियन के डीसी विजय सिंह, 12 मई 1996 को असम में उग्रवादी संगठन के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए थे। उसके बाद पांच सितंबर 1997 में डीआईजी एसी कुमे ने इंफाल में मिलिटेंट के साथ मुठभेड़ में शहादत दी। सहायक कमांडेंट सीसी पाठक ने 27 अप्रैल 2004 को श्रीनगर में एक आतंकी हमले में शहादत दी थी। एसएसबी में दो एसी, एक डीसी, एक टूआईसी और एक डीआईजी ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। 

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