सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि व्यक्ति की आजादी समाज के हितों से ऊपर नहीं हो सकती। बात जब देश की सुरक्षा से जुड़ी हो तो व्यक्ति की आजादी पर लगाम लगाई जा सकती है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े मसलों पर किसी को भी एहतियातन हिरासत में लिया जा सकता है। जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि व्यक्ति की आजादी महत्वपूर्ण है। हम इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट व्यक्ति की आजादी को लेकर प्रतिबद्ध हैं, लेकिन यह आजादी समाज के हित से ऊपर नहीं हो सकती।
पीठ ने यह टिप्पणी राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा सोने की तस्करी के किंगपिन निसार अलीयार और उसके सहयोगियों को हिरासत में लेने के निर्णय को सही करार देते हुए की। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके हिरासत आदेश को निरस्त कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। पीठ ने पाया कि डीआरआई ने मुताबिक, जुलाई 2018 से मार्च 2019 के बीच इन तस्करों ने करीब 1000 करोड़ रुपये की तस्करी की थी, यानी इस दौरान इस गिरोह ने करीब 3396 किलो सोने की तस्करी को अंजाम दिया।
निसार वर्ष 2016 से तस्करी के धंधे में कथित तौर पर लिप्त है। डीआरआई की दलील थी कि इस आशंका पर इन लोगों को हिरासत में लेने का निर्णय लिया गया था कि जमानत मिलने पर वे अपने गोरखधंधे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी कारण एहतियातन इन लोगों को हिरासत में लेने का निर्णय लिया गया था। उसका कहना था कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मसला है।