पिछले छह महीने में देश में बच्चियों के होने वाले दुष्कर्म की करीब 24 हजार घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पूरे मामले का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। इस तरह की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद चिंता जताई है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इस पर गौर करेंगे कि क्या ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जा सकती है। क्या ऐसे मामलों के लिए विशेष अदालत का गठन किया जा सकता है। अमाइकस क्यूरी को इन मुद्दों पर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
वास्तव में इस तरह की घटनाओं से आहत चीफ जस्टिस ने गत एक जुलाई को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने के लिए कहा था कि इस वर्ष एक जनवरी से लेकर 30 जून के बीच बच्चियों के साथ दुष्कर्म के कितने मुकदमे दर्ज किए गए।
बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इस दौरान यूपी में 3457 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें से 1779 मामलों में अब तक छानबीन जारी है। वहीं मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है। वहां इस तरह के 2389 मुकदमे दर्ज किए गए। वहां पुलिस 1841 मामलों में चार्जशीट दायर कर चुकी है जबकि 247 मामलों का ट्रायल पूरा हो चुका है। इस अवधि के दौरान राजस्थान में 1285, कर्नाटक में 1133, गुजरात में 1124, तमिलनाडु में 1043, केरल में 1012, ओडिशा में 1005 मुकदमे दर्ज किए गए।