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अस्पतालों ने इलाज से क्यों किया इनकार?: CJI सूर्यकांत ने पूछे सवाल, पीड़ित महिला वकील के पत्र पर लिया संज्ञान

Mon, 27 Apr 2026 11:33 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिला वकील से कथित बर्बर मारपीट मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को जांच वरिष्ठ अधिकारी, महिला एसीपी या डीसीपी, को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने तीन अस्पतालों द्वारा पीड़िता को भर्ती करने से इनकार के पहलू की भी जांच के निर्देश दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिला अधिवक्ता पर कथित बर्बर हमले के मामले का सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को कई सख्त निर्देश दिए। अदालत ने मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने का आदेश दिया और कहा कि जांच अधिकारी महिला अधिकारी हो तो बेहतर होगा, जो एसीपी या डीसीपी रैंक की हो।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग वाला पत्र मिला था, जिसके बाद स्वतः संज्ञान लिया गया।

आरोपी पति गिरफ्तार

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पीड़िता के पति, जो हमले का मुख्य आरोपी है, को 25 और 26 अप्रैल की दरम्यानी रात गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपी मनोज कुमार, जो सोनिया विहार का निवासी है, जिसे रविवार को खजूरी खास इलाके से पकड़ा गया। आरोप है कि उसने 22 अप्रैल को अपनी 38 वर्षीय पत्नी पर चाकू से हमला किया। पूछताछ में उसने पारिवारिक विवाद के चलते वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की है।

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तीन अस्पतालों ने भर्ती से किया इनकार?

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक गंभीर पहलू पर भी चिंता जताई। अदालत ने दिल्ली को निर्देश दिया कि यह जांच की जाए कि घायल महिला को तीन अलग-अलग अस्पतालों ने भर्ती करने से कथित रूप से इनकार क्यों किया।

अदालत ने कहा कि अगर गंभीर हालत में किसी पीड़ित को समय पर इलाज नहीं मिलता है, तो यह बेहद चिंताजनक विषय है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

बच्चों के बारे में भी निर्देश

पीठ ने शिकायत में लगाए गए उस आरोप पर भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया कि पीड़िता के ससुराल पक्ष दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गया है और उनका पता नहीं चल पा रहा। अदालत ने पुलिस को दोनों बच्चों का तत्काल पता लगाने का निर्देश दिया।

स्टेटस रिपोर्ट मांगी

शीर्ष अदालत ने जांच अधिकारी को मामले की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश दिया है। फिलहाल पुलिस घरेलू विवाद समेत सभी संभावित पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।

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