सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की फिजिकल सुनवाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। वकीलों की विभिन्न संस्थाओं के अनुरोध पर इसे प्रायोगिक आधार पर शुरू किया जा रहा है।
कोरोना वायरस महामारी के चलते 25 मार्च से लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बाद सुप्रीम कोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामलों की सुनवाई कर रहा है। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद शीर्ष अदालत ने मौजूदा व्यवस्था जारी रखने का निर्णय लिया है।
जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की समिति ने इस महीने की शुरुआत में चीफ जस्टिस एसए बोबडे से प्रायोगिक आधार पर मामलों की फिजिकल सुनवाई शुरू करने की सिफारिश की थी। समिति ने विभिन्न बार एसोसिएशन से इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया था।
समिति ने फिजिकल सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा नियमों को भी लागू करने को कहा था। हालांकि सीमित मामलों की फिजिकल सुनवाई कब से शुरू होगी, इस बारे में एसओपी में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
शीर्ष कोर्ट के महासचिव संजीव एस. कलगांवकर द्वारा जारी एसओपी में कहा गया है कि प्रायोगिक तौर पर शुरू हो रही फिजिकल सुनवाई प्रारंभ में तीन कोर्ट रूम में होगी। परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट रूम की संख्या में कमी या बढ़ोतरी की जाएगी। केवल सीमित संख्या में वकीलों/ पार्टी और पक्षकारों को कोर्ट रूम में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी और ऐसे मामलों में जहां पार्टियों की संख्या अधिक है तो प्रति पार्टी एक वकील (एओआर) और एक प्रतिवादी वकील को अंदर आने की मंजूरी दी जाएगी।